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खरीफ सीजन में केवल 1770 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया

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खरीफ सीजन में केवल 1770 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया
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बिजनौर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसान लगातार मुंह मोड़ते जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से बीमा कराने के लिए किसानों को जागरूक करने के काफी प्रयास करने के बावजूद खरीफ सीजन में केवल 1770 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया है। खादर के कुछ किसान ही फसलों का बीमा करा रहे हैं। हालांकि योजना के स्वैच्छिक होने से किसानों को फायदा ही हुआ है।
किसानों की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना काफी समय से संचालित हो रही है। जब किसान बैंक से केसीसी पर ऋण लेते हैं तो उन्हें दर्शाना होता है कि वे किस फसल के लिए ऋण ले रहे हैं। किसान को उस फसल का नाम लिखना होता है। पहलेे होता था कि किसान किसी भी फसल पर ऋण लेता था तो उस फसल पर कुल ऋण राशि का डेढ़ से दो प्रतिशत प्रीमियम देना पड़ता था। यानि किसान ने एक लाख का ऋण लिया तो उसके दो हजार रुपये फसल बीमा के प्रीमियम के रूप में कट जाते थे। प्रीमियम तो किसानों को भरना पड़ता था, लेकिन मुआवजे की तमाम शर्त रहती थीं।
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किसान अधिकतर ऋण गन्ने पर लेते थे, जिसे कोई नुकसान नहीं होता है। किसानों के विरोध को देखते हुए गन्ने को योजना से बाहर कर दिया गया और पिछले साल फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया गया। यानि जो किसान चाहते हैं वे ही इसका लाभ लेंगे। योजना के स्वैच्छिक होने के बाद किसान इसका ज्यादा लाभ नहीं ले रहे हैं। खरीफ सीजन के लिए जिले के साढ़े तीन लाख से अधिक किसानों में से केवल 1774 ने ही फसल का बीमा कराया है। इससे पहले रबी सीजन में भी केवल साढ़े तीन हजार किसानों ने ही योजना में फसलों का बीमा कराया था।
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मुआवजे की हैं कठोर शर्तें
किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ तब मिलता है जब पूरे गांव की फसल बर्बाद हो जाए। ऐसा न होने तक किसान को योजना का लाभ नहीं मिलता है। इससे पहले पूरे ब्लॉक की फसल बर्बाद होने पर किसान को मुआवजे का प्रावधान था। भाकियू युवा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि पहले किसानों को योजना में जबरन शामिल करके प्रीमियम लिया जाता था। अब केवल वही किसान योजना में शामिल होते हैं जिन्हें इसकी जरूरत होती है।
फसल वर्ष बीमित किसान बीमित राशि प्रीमियम मुआवजा
खरीफ 2016 274118 12262 245 2.23
रबी 2016 10388 6202 43.68 41.15
खरीफ 2017 3637 959 19.18 30.41
रबी 2017 1995 790 11.65 1.54
खरीफ 2018 1515 658 13.17 23.46
रबी 2018 1253 657 9.56 0.17
खरीफ 2019 877 782 5.60 23.82
रबी 2019 1575 924 13.56 3.95
खरीफ 2020 3002 711 14.22 00
रबि 2020 3034 723 34.45 1.80
(नोट : आंकड़े विकास भवन से लिए गए हैं।)
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