...करती हर हाल में मां-बाप की खिदमत बेटी
नजीबाबाद । बज्म-ए-उर्दू अदब की ओर से बेटी पर एक तरही शेरी नशिस्त में शायरों ने उम्दा कलाम पेश कर खूब - वाहवाही लूटी। तुझ पे आए न कभी कोई मुसीबत बेटी... को सराहा गया।
अदबी संस्था बज्म-ए-उर्दू अदब कल्हेड़ी की ओर से हाजी इखलास एडवोकेट के आवास पर शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। वाजिद और इदरीश की नात -ए- पाक से शेरी नशिस्त का आगाज हुआ। कारी शाकिर रिजवी ने सुनाया - दिल में रहती है मेरे बस यही हसरत बेटी। डॉक्टर आफताब नोमानी ने सुनाया - बेटियां होती नहीं हैं कभी जहमत बेटी, ये तो अल्लाह की है बोलती रहमत बेटी। मास्टर ताबिश ने सुनाया - तू हमेशा रहे खाविंद की जीनम बेटी, तुझ पे आए ना कभी कोई मुसीबत बेटी। डॉक्टर इलियास अंसारी ने सुनाया - नहीं करती कोई शिकवा ना शिकायत बेटी, करती हर हाल में मां-बाप की खिदमत बेटी। नदीम साहिल ने सुनाया - पहली बेटी पे ही सर अपना पकड़े बैठे हो, शादमां हो कि है जन्नत की बशारत बेटी। हाजी इखलाख ने सुनाया - सुनके आवाज सदा तूने कहा जी पापा, इस आदत से तू सदा पाएगी अजमद बेटी। हाजी अनवार अहमद की अध्यक्षता और कारी शाकिब के संचालन में आयोजित शेरी नशिस्त में मोहम्मद वाजिद, इदरीश, मुमताज अहमद, शमशाद अहमद ने भी कलाम पेश किए। इस अवसर पर हाजी अख्तर हुसैन, इकबाल अहमद, जमाल इखलास, फरीद अहमद, नसीम अहमद आदि मौजूद रहे।