बिजनौर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय आह्वान पर आईएमए बिजनौर के तत्वावधान में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में मिक्सोपैथी (आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नैचुरोपैथी) को मॉडर्न मेडिसिन (एलोपैथी) के साथ मिश्रित करने के विरोध में आईएमए ने कार्य बहिष्कार करते हुए असहयोग आंदोलन किया। इसे प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की जनपदीय शाखा का भी सहयोग मिला। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं ही जारी रहीं।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने शुक्रवार को कार्य बहिष्कार करते हुए असहयोग आंदोलन किया। इस दौरान केवल कोविड-19 और आपातकालीन सेवाएं ही जारी रहीं। इस आंदोलन को प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने भी अपना समर्थन दिया। संघ के अध्यक्ष अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बीएस रावत ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सक अपनी जान पर खेलकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार अव्यवहारिक नीति चिकित्सकों के मनोबलों का न केवल हृास कर रही है, बल्कि उनकी कार्य क्षमता को भी प्रभावित कर रही है।
आईएसए अध्यक्ष डा. सुभाष राणा के अनुसार भारत में लगभग 95 प्रतिशत मरीज आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा इलाज कराते हैं। सघन चिकित्सा सुविधा आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा संपादित होती है। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना अलग ही महत्व होता है और सभी चिकित्सकों को स्वतंत्र रूप से इन पद्धतियों का वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईएमए मिक्सोपैथी के शुरु से ही खिलाफ है। अगर ऐसा हुआ तो हमारे देेश में चिकित्सकों की गुणवत्ता और उनके स्तर में काफी गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी, नैचुरोपैथी को मॉडर्न (एलोपैथी) के साथ मिक्स कर चिकित्सकों के साथ साथ जनता के हितों से भी खिलवाड़ किया है। आईएमए इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस अवसर पर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बीएस रावत, सचिव डा. कपिल चौधरी, आईएमए अध्यक्ष डा. सुभाष राणा, डा. नवनीत गर्ग, सचिव डा. राहुल देशवाल, डा. बीरबल सिंह, डा. पंकज त्यागी, डा. राजीव चौधरी, डा. राहुल कुमार आदि शामिल रहे।