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पीली बांध की हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा

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अमानगढ़ रेंज के पास स्थित पीली बांध। - फोटो : BIJNOR
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पीली बांध की हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा
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बिजनौर। अमानगढ़ वन रेंज से सटे पीली बांध की हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा करते हुए खेती की जा रही है, जिसे कब्जामुक्त नहीं कराया जा सका। फिलहाल बांध की जल भंडारण क्षमता भी लगातार कम हो रही है। बांध के डूब क्षेत्र को छोड़कर बाकी जमीन पर फसल लहलहा रही हैं।
साल 1962 में पीली, धारा और बनैली नदी के पानी का भंडारण करने के लिए कच्चा बांध बनाया गया था। बांध की लंबाई 15 किलोमीटर है। करीब 5500 एकड़ जमीन का बांध के लिए अधिग्रहण किया गया। बांध बनाकर सिंचाई के लिए तीन नहरों का निर्माण किया गया। कभी तीन नहरों में इस बांध से पानी सप्लाई किया जाता था। सिंचाई विभाग के सूत्रों की मानें तो 3586 एकड़ मेें ही पानी जमा हो पाता है। बाकी जमीन में पानी नहीं ठहरता।
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शुरुआत में खाली जमीन पर खेती के लिए पट्टे दे दिए गए थे। बाद में इन सभी पट्टों को निरस्त कर दिया गया, लेकिन जमीन को खाली नहीं कराया जा सका। तब से लेकर अब तक तमाम कब्जाधारक जमीनों पर काबिज हैं। बांध के डूब क्षेत्र के अलावा हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा बना हुआ है। हालांकि जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए शासन ने निर्देश जारी किए थे। जो धरातल पर नहीं आ सके। अब हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा बना हुआ है।
सिर्फ एक ही नहर में पानी की आपूर्ति
बांध बनाकर तीन नहरों का निर्माण किया गया था। बांध में जल भंडारण क्षमता यानी डूब क्षेत्र कम होने की वजह से दो नहरों में पानी पहुंचना बंद हो गया। इन दोनों नहरों को बाद में दूसरे बांध से जोड़ा गया। पीली बांध से अब केवल एक नहर में पानी की आपूर्ति की जाती है। बाकी दो नहरों के हेड तक पानी नहीं पहुंच पाता। इन बंद पड़ें दोनों हेड के सामने बांध के अंदर खेती हो रही है।
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पीली बांध की जमीन में सिर्फ खेती का अतिक्रमण है, कोई पक्का निर्माण नहीं है। डूब क्षेत्र को छोड़कर खाली जमीनों के पहले पट्टे किए जाते थे, बाद में उन्हें निरस्त कर दिया गया। फिलहाल तो जमीनों पर कब्जा है। हालांकि फिर से पट्टे पर देने की व्यवस्था शुरू हो सकती है।
- आरपी सिंह, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग, मुरादाबाद

मानगढ़ रेंज के पास पीली बांध का जलाशय।- फोटो : BIJNOR

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