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Bijnor News: प्रधान ही बनेंगे प्रशासक तो पंचायतों में होगा बेहतर कामकाज

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नींदड़ू। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं होने, डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन का कार्य अगस्त 2026 तक जारी रहने और प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सूबे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर होने संभव नहीं हैं। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है।
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ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की कवायद में बतौर प्रशासक एडीओ (पंचायत) की नियुक्ति या ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में प्रशासक समिति का गठन होगा। प्रधान स्वयं के प्रशासक नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। तर्क है कि वह एडीओ के मुकाबले गांव की आवश्यकताओं और समस्याओं से ज्यादा वाकिफ हैं तथा विकास कार्य बेहतर करा सकते हैं।

नींदड़ू खास की प्रधान अदीबा के पति मोहम्मद राहत का कहना है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ना तय है। बढ़े कार्यकाल के लिए शासन की ओर से प्रशासक की नियुक्ति की जानी है। एडीओ पंचायत या प्रधान में से किसी एक को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाएगी। एडीओ दफ्तर में बैठकर ही कार्य करेंगे। यदि ग्राम पंचायत का कार्यकाल बढ़ाया जाता है या फिर बतौर प्रशासक उन्हें दायित्व सौंपा जाता है, तो वह जरूरत के हिसाब से अपनी पंचायत में शेष रहे विकास कार्य पूरा कराएंगे।
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बाजीदपुर-बीरू की प्रधान अरमीना के पति मोहम्मद नौशाद का कहना है कि 20 मई को जिलाध्यक्ष सतेंद्र चौधरी के नेतृत्व में जिले के प्रधान लखनऊ जाकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखते हुए एडीओ (पंचायत) को प्रशासक बनाने का विरोध करेंगे और प्रधानों को ही प्रशासक बनाने की मांग रखेंगे। प्रधान के प्रशासक बनने की स्थिति में वह पंचायत के भीतर बेहतर कार्य करा पाएंगे।

मोहम्मेद अलीपुर भिक्कन की प्रधान कमरुन्निसा के पति शहाबुद्दीन का कहना है कि सरकार की ढुलमुल नीति के कारण समय पर चुनाव नहीं हो रहे हैं। ऐसे में पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प रह गया है। प्रधान ही बेहतर जानते हैं कि गांव में कहां विकास कार्य होने आवश्यक हैं और कहां नहीं। प्रधान को प्रशासक बनाने की सूरत में वह पंचायत में ठीक से कार्य करा पाएंगे।

मनकुआ की प्रधान कलावती देवी के पति ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि आमतौर पर पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एडीओ (पंचायत) को प्रशासक नियुक्त किया जाता रहा है। उन्हें ग्रामीणों की जरूरतों और गांवों की समस्याओं की ज्यादा जानकारी नहीं होती। यदि प्रधान को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाती है, तो गांव में जरूरत के हिसाब से बेहतर विकास कार्य कराए जाने में आसानी होगी।
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