पुल और सड़क बने तो बदले किसानों की जिंदगी
बिजनौर। खादर में हजारों किसान जान हथेली पर रखकर खेती कर रहे हैं। खेती करने के लिए ये किसान गंगा पार जाते हैं। गंगा की उफनती लहरों के बीच ये किसान नाव से और कभी कभी तो पैदल ही गंगा पार जाते हैं। अगर गंगा पर तीन चार पुल बनाकर एक ओर एक्सप्रेस वे बनाया जाए तो किसानों को बहुत फायदा होगा।
गंगा किनारे कई गांव बसे हैं। गांव की खेती गंगा की ओर थी। लेकिन गंगा के धीरे धीरे गांवों की ओर कटान करके बढ़ने से जमीन कटकर गंगा की धारा के दूसरी ओर चली गई। 27 गांवों के किसान अब गंगा की धारा को पार करके खेती करने के लिए जाते हैं। इसके लिए गांवों के बाहर जोड़े वाली नाव चलती है। किसान अपने ट्रैक्टर ट्राली, भैंसा बुग्गी से गन्ना व चारा लाते हैं। गंगा का जलस्तर कम होने पर कभी कभी ये पैदल या तैरकर गंगा पार करते हैं। इसमें किसानों को जान भी गवानी पड़ती है।
2018 में चारा ला रहे किसानों की नाव पलटने पर दस महिलाएं गंगा की धारा में डूब गईं थी। इनमें से चार महिलाओं का अब तक कुछ पता नहीं चला है। किसान काफी समय से तटबंध और गंगा पर पुल बनवाने की मांग कर रहे हैं। अगर इस पर काम किया जाए तो गंगा के किनारे बसे गांवों के किसानों की किस्मत चमक जाएगी। हर चार से पांच गांवों के बीच में एक पुल गंगा पर बना दिया जाए तो किसान उस पर अपनी फसल ला सकते हैं। इसके अलावा गंगा किनारे एक्सप्रेस वे बनने से किसानों को बहुत फायदा होगा। यह क्षेत्र पिकनिक स्पॉट के रूप में भी विकसित हो सकता है।
ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं। किसान नेता राजेंद्र सिंह के मुताबिक खादर के किसानों की समस्याओं को शासन के सामने उठाया जा रह है। शासन को किसानों के लिए गंगा पर पुल तो बनाने ही चाहिएं। इससे शुक्रताल जाने वाले श्रद्धालुओं को भी फायदा होगा।