बिजनौर। नगीना से 300 करोड़ रुपये सालाना हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता है। अमेरिका के टैरिफ की वजह से काष्ठकला का निर्यात प्रभावित हुआ। ऐसे में अब भारत और अमेरिका के बीच बहु-प्रतीक्षित व्यापार समझौते की चर्चा चल रही है। अगर, समझौता हुआ तो टैरिफ घटेगा जो, नगीना के काष्ठकला उद्योग के लिए बूस्टर का काम करेगा।
नगीना के हैंडीक्राफ्ट के सालाना निर्यात में करीब 50 प्रतिशत अमेरिका के साथ होता है। नगीना के करीब 10 निर्यातक सीधे अमेरिकी ग्राहकों को उत्पाद भेजते हैं। जबकि, अन्य उद्यमी मुरादाबाद के निर्यातकों के सहयोग अपना सामान अमेरिका भेजते हैं। वर्तमान में भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लागू है। समझौते के तहत टैरिफ को घटाकर 15 से 16 प्रतिशत तक किया जा सकता है। फिर से अमेरिका के साथ निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका सकारात्मक प्रभाव नगीना के काष्ठकला उद्योग पर भी दिखाई देगा। जिससे नगीना से अमेरिका जाने वाले 150 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की राह आसान होगी। क्योंकि, अभी तक टैरिफ अधिक होने से कुछ ऑर्डर कैंसिल हो गए हैं। जबकि, कुछ ऑर्डर रुके हुए हैं।
नगीना से इन उत्पादों का होता है निर्यात
काष्ठकला में लकड़ी के बर्तन, लकड़ी का बॉक्स, लकड़ी ट्रे, छड़ी, घड़ी सहित अन्य उत्पाद तैयार कर अमेरिका सहित अन्य देशों में निर्यात होता है। नगीना के काष्ठकला उत्पादों की अमेरिका में काफी मांग है। जिस वजह से खपत भी अच्छी होती है।
निर्यात उद्यमियों की रीढ़ है। टैरिफ का प्रभाव बिजनौर निर्यातकों और उद्यमियों पर भी पड़ा। दोनों देशों के बीच समझौते का प्रयास अच्छा संकेत है। टैरिफ घटता है तो इसका फायदा नगीना के काष्ठकला उद्योग को जरूर मिलेगा।
....विकास अग्रवाल, डिविजनल चेयरमैन, आईआईए