‘सभ्यता और संस्कारों से आदर्श देश की पहचान’
नजीबाबाद। वैदिक विद्वान स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आर्य समाज अनुपम चिंतन का वह मंच है जो हमें विश्व की सबसे प्राचीन, पूजनीय और समृद्ध वैदिक संस्कृति, सभ्यता से शिक्षा एवं प्रेरणा देकर वसुधैव कुटुंबकम से जोड़ता है। इसी वैदिक चिंतन और व्यवहार से ही आदर्श परिवार, आदर्श समाज, आदर्श देश और आदर्श विश्व बनाना संभव है।
नजीबाबाद में वेद के प्रचार-प्रसार अभियान के अंतर्गत वैदिक ज्ञान आश्रम यमुनानगर से पधारे आर्य समाज के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती का आर्य समाज के लोगों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि संस्कृति किसी भी देश, जाति और समुदाय की आत्मा होती है और जिससे उन समस्त संस्कारों का बोध होता है, जिनके सहारे वह अपने आदर्शों, जीवन मूल्यों का निर्धारण करता है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और देश को आदर्श बनाने के लिए लोगों को अपनी संस्कृति, संस्कारों को जानने और अपने व्यवहार में लाने की जरुरत है। वेद, वैदिक धर्म, वैदिक यज्ञ से जुड़ना ही व्यक्ति के सुख, समृद्धि और उन्नति का सही मार्ग है। स्वागत समारोह में आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय सहमंत्री डॉ. सौरभ, पंडित संजय डबराल, डॉ. देवकीनंदन वर्मा, कुसुम, मीनाक्षी, संदीप, सुदेश कुमारी आदि समाजसेवी मौजूद रहे।