बिजनौर। बिजनौर के बाघों पर शिकारियों की नजर सालों से हैं। वर्ष 2012 में एक साथ दो बाघों को अमानगढ़ से शिकारियों ने मारा था। रेहड़ पुलिस ने दस से ज्यादा शिकारियों को उनकी खाल, हड्डी और मांस के साथ धर दबोचा। इसके बाद यह सिलसिला आगे भी जारी रहा। पहले 2018 और उसके बाद वर्ष 2023 में भी शिकारी पकड़े गए।
जिले में अमानगढ़ टाईगर रिजर्व फॉरेस्ट ऐसा जंगल हैं, जहां पर कार्बेट पार्क से बाघों की आवाजाही रहती है। बाघ गणना के मुताबिक वर्तमान में यहां 32 बाघ मौजूद हैं। वहीं शिकारियों से जंगल के शान कहे जाने वाले बाघ को खतरा भी बढ़ रहा है। रेहड़ क्षेत्र में पुलिस और एसटीएफ ने रेहड़ क्षेत्र में दस से ज्यादा शिकारी पकड़े थे। पूछताछ में शिकारियों ने बताया था कि अमानगढ़ में खटका लगाकर बाघ फंसाए। इसके बाद पीट-पीटकर इन्हें मार डाला। खाल, मांस लेकर तस्करी करने जाते समय पकड़े गए।
वर्ष 2018 में मई माह में एसटीएफ व वन विभाग की टीम ने बढ़ापुर के वन क्षेत्र से नगीना बॉर्डर के पास एक नाले से दो व्यक्तियों को पकड़ा था। दोनों के पास एक बैग से बाघ की खाल व हड्डी बरामद हुई। बाघ की खाल करीब दस फुट लंबी व चार फुट चौड़ी है।
इसके अलावा 17.6 किलो हड्डी भी बरामद की है। वर्ष 2023 के जुलाई माह में उत्तराखंड की एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो अपने स्तर से काशीपुर में शिकारियों से बाघ की खाल बरामद की। जांच और पूछताछ आगे बढ़ी तो पकड़े गए चारों शिकारियों ने बढ़ापुर के जंगल में बाघ के मारने का दावा किया। इसके बाद जांच होती रही।