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कब तक बेटियां निर्भया बनती रहेंगी

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अफजलगढ़ में आयोजित गोष्ठी में शपथ लेतीं महिलाएं। - फोटो : DHAMPUR
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कब तक बेटियां निर्भया बनती रहेंगी
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अफजलगढ़। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्कर्म के बाद हत्या से जनमानस में आक्रोश है। हर कोई इंसाफ में देरी होने से इंसाफ की दुहाई देने वालों से खासा नाराज है। पहले निर्भया अब डॉक्टर बिटिया की साथ हुई घटना से महिलाओं में भय का माहौल है। खुद महिलाएं स्वयं और अपने परिवार की बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अमर उजाला के अभियान अपराजिता के तहत आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने अन्याय के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज उठाने का संकल्प लिया।
अमर उजाला के अभियान अपराजिता के तहत कालागढ़ रोड स्थित पारुल के प्रतिष्ठान पर मंगलवार को हुई महिलाओं की गोष्ठी में न केवल हैदराबाद बल्कि पूरे देश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर चिंता जाहिर की गई। इस दौरान महिलाओं ने ऐसा वहशीपन करने वालों को तो सरेआम चौराहे पर फांसी दे देनी चाहिए। हैदराबाद में हुई घटना ने मानवता को भी शर्मशार कर दिया है। दिल दहला देने वाली इस घटना से पूरा देश आहत है। देश की महिलाएं इस शर्मनाक घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों को जल्द से जल्द सजा की मांग कर रही हैं। इस दौरान महिलाओं ने नारी सम्मान को बरकरार रखने के लिए आत्मरक्षा की शपथ ली। महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। गोष्ठी में आरती अग्रवाल, शिल्पी अग्रवाल, आधी अग्रवाल, रश्मि माहेश्वरी व सीमा गुप्ता रहीं।
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नारी को अबला मत समझों
समाज सेविका पारुल अग्रवाल ने कहा कि अपनी बेटियों को चांद तो बनाओ लेकिन उनमें सूरज जैसा तेज भी भरो। नारी को अबला मत समझों। धरती का शृंगार हैं ये। जीवन ज्योति जगाई है, सृष्टि का आधार है ये।
सख्त कानून बनाने की जरूरत
शिल्पी माहेश्वरी ने कहा कि दरिंदों को उनके किए की ऐसी सजा मिले कि औरों की भी रूह कांपे। उन्हें बीच चौराहे फांसी पर लटका देना चाहिए । हमारी देश की सरकार को अब ऐसे जघन्य अपराध के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
बेटियों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करें
श्वेता अग्रवाल का कहना है कि मेरे आंगन की नन्ही परी अब बड़ी होने लगी है ,मेरी गोद से निकल कर बाहर जाने को मचलने लगी है। उसे बाहर भेजने में मेरा दिल घबराता है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा तब सार्थक होगा ,जब बेटी की सुरक्षा के प्रति हृदय हमारा आश्वस्त होगा।
बेटों से भी पूछे सवाल
रुचित गुप्ता का कहना है कि आज भी परिजन बेटियों को रोकते टोकते हैं। घर जरा भी लेट हो जाएं तो सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन बेटों से कोई सवाल जवाब नहीं करता। बेटा रात में देर से आए तो कोई नहीं पूछता। जिस दिन बेटों से सवाल जवाब होने लगे तो इस तरह की घटनाएं खुद रुक जाएंगी।
बेटियां बने अपराजिता
आभा गुप्ता का कहना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है तो फिर कब तक निर्भया बनती रहेंगी। वह खुद में इतनी क्षमता पैदा करें कि कोई उनकी तरफ आंख उठाकर भी देेखने की जरूरत न कर सके। वे अपराजिता बनें।
फांसी की सजा भी है कम
ऊषा विश्नोई का कहना है कि दुष्कर्म के बाद जलाकर मार डालने से बड़ा वहशीपन कुछ नहीं हो सकता। ऐसे दरिंदों के लिए फांसी भी कम है। सरकार को फांसी भी सख्त कोई सजा तलाशनी चाहिए ताकि कोई ऐसा करने की जरूरत ना कर सके।
बेटों को बचपन से दें अच्छे संस्कार
शशि गुप्ता का कहना है कि एक मां की कोख से जन्मे इंसान ने ही ये वहशीपन किया है। उसकी मां आज अपने बेटे को कोस रही है। अच्छा ये है कि बचपन से ही अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। ध्यान दें तो इस तरह की घटनाएं खुद ही रुक जाएंगी।
डर से ही हैवानियत पर होगी जीत
पूनम अग्रवाल का कहना है कि सिर्फ कैंडल मार्च से काम नहीं चलेगा। हम चाहते हैं कि कबूल करने के बाद भी तुरंत न्याय मिलना चाहिए। जेल नहीं जनता के हवाले किया जाना चाहिए। ऐसे लोगों के अंदर डर पैदा करने की है जरूरत।
जल्द हो कानूनी कार्रवाई
मोनिका गुप्ता का कहना है कि हमारे देश में भी मुस्लिम देशों की तरह कानून बनें। दुष्कर्मियों को चौराहे पर खड़ा कर सबके सामने जिंदा जलाया जाएं। जल्द हो कानूनी कार्रवाई। सभी देशों में दुष्कर्मियों के लिए मौत की सजा बरकरार है।
मोमबत्ती जलाने से कुछ नहीं होगा
आंचल अग्रवाल का कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कौन सी क्रांति की अलख जगाने निकले हैं। मोमबत्ती जलाकर नारे लगाने को कौन सुन रहा है। लड़कियों को खाना बनाना ही नहीं। अपितु मार्शल आर्ट सिखना चाहिए। तभी वह अपनी रक्षा कर सुरक्षित रह सकती है।
कठोर कानून बनाएं
सुगंधा अग्रवाल का कहना है कि यदि उन्हें स्कूल या बाहर कहीं भी ऐसा लगे कि उनके साथ कुछ गलत हो सकता है या कोई गलत हरकत महसूस हो तो तुरंत अपने माता पिता और पुलिस को ये बात बतानी चाहिए, क्योंकि कभी कभी बात दबाने से बड़ी बनती है।
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आत्मरक्षा के लिए ट्रेनिंग जरूरी
बरखा अग्रवाल का कहना है कि सभी लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के लिए ताइक्वांडो, जूडो सीखें। मन से मजबूत बनें। हेयर पिन, पानी की बोतल, उनके नाखून उनके हथियार हैं। यदि कुछ गलत हो तो इनका प्रयोग करें।
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