थामे रहे किसान आंदोलन की कमान
बिजनौर। जिले के किसान नेताओं ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। भाकियू के तत्कालीन युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार किसान आंदोलन को धार देने में जुटे रहे। उन्होंने किसानों के खिलाफ पुलिस की कोई कठोर कार्रवाई भी नहीं होने दी।
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन सबसे पहले कूदा। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने जिले के हर गांव में जाकर सभाएं की और बाइक रैली निकाली। बाइक रैली में काफी किसान शामिल हुए। वे अकेले नेता रहे जो आंदोलन में दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचने में सफल रहे थे। वहां एक मीडिया कर्मी को इंटरव्यू दिया था जो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था। भाकियू के पूर्व युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह जिले ही नहीं गाजीपुर बॉर्डर पर चले आंदोलन में रणनीति बनाने में लगे रहे। वे भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल हुए। दिगंबर सिंह खुद हजारों किसानों को लेकर दिल्ली जाते थे। दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद जब काफी किसान घरों को आ गए थे और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था तब भी दिगंबर सिंह राकेश टिकैत के साथ ही खड़े रहे। लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत के बाद स्थिति को संभालने में भी दिगंबर सिंह राकेश टिकैत के साथ ही रहे। जब लखीमपुर खीरी से राकेश टिकैत आ गए थे तब भी वे वहां की व्यवस्था देखने के लिए दिगंबर सिंह को ही वहां छोड़कर आए थे।