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इस बार गुड़ का रिकार्ड उत्पादन, गुणवत्ता में भी लिखी नई इबारत

Mon, 10 Jun 2019 12:11 AM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
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बिजनौर में  जिले में इस साल गुड़   का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। खांडसारी इकाइयों ने गुड़ की क्वालिटी में एक न ई इबारत लिखी है। विदेश में भी जिले के गुड़ को पसंद किया जा रहा है।
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 शासन की नई खांडसारी नीति ने गुड़ निर्माताओं की तकदीर बदल दी है। जिले में गुड़ खूब बनने लगा  है। किसान अपने खेतों पर ही खडा कोल्हू लगाकर गुड़ बनाने लगा है। इससे छोटे किसान अच्छा पैसा जुटा रहे हैं। किसान को आर्थिक रुप से मजबूत होने की ओर कदम बढ़ाने की हिम्मत बढ़ी है। जिले में इस साल 69 खांडसारी इकाई चली हैं। सहायक चीनी आयुक्त सीके वर्मा के अनुसार इन खांडसारी इकाइयों ने 95 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है। खांडसारी इकाइयों ने बिजनौर व चांदपुर चीनी मिलों दोनों को मिलाकर अधिक गन्ना पेरा है। पिछले साल करीब करीब 90 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था।
इस साल खांडसारी इकाइयों ने 10.25 लाख क्विंटल गुड़ बनाया है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ लाख क्विंटल अधिक है। खांडसारी इकाइयों की रिकवरी भी इस साल 13.5 प्रतिशत है। यह गत वर्ष से करीब दो प्रतिशत अधिक है। खांडसारी इकाइयों ने 51 हजार क्विंटल खांडसारी बनाई है।
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जिले का गुड़ विदेशियों को भाया
जिले के गुड़ की क्वालिटी गुजरात, राजस्थान आदि जिलों में पसंद की जा रही है। जो भारतीय विदेशों में बसते है वे अपने साथ जिले का बना गुड ले जाते हैं। विदेशी भी बिजनौर का बना गुड़ पसंद करने लगे हैं। रोटरी क्लब हल्दौर के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह बताते है कि रोटरी इंटरनेशनल की टीम उनके कार्यकाल में जिले में आई थी। विदेशियों को गुड़ व मक्का की रोटी बेहद पसंद आई थी। सहायक चीनी आयुक्त सीके वर्मा का कहना है कि अगले सालों में गुड़ के निर्यात को प्रोत्साहन देने के बारे में व्यापारियों से बात की जाएंगी।

जिला जैविक गुड़ बनाने की पहली मिसाल
जिले ने सबसे पहले जैविक गुड़ तैयार करने की मिसाल बनाई है। हल्दौर विकासखंड के गांव मोहनपुर चांदा नंगली निवासी प्रोफेसर यशपाल सत्य आईआईटी दिल्ली में थे। उन्होंने जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए खारी में सब्जी आदि उगानी शुरू कराई थी। किसानों को जैविक खेती के फायदे गिनाए । उनके भाई शूरवीर सिंह ने जैविक गन्ना पैदा किया। घर पर गुड़ तैयार किया। उनकी प्रेरणा से गोविंदपुर के समरपाल सिंह जैविक गुड़ बना रहे है। उनका गुड़ दिल्ली आदि शहरों में पैकिंग में बिकता है।
छोटे किसानों के घरों में आईं खुशियां
इस साल गुड़ ने किसानों के घरों में खुशियां ला दी हैं। गुड की रिकवरी व रेट दोनो अच्छे रहै हैं। लघु एवं मध्यम किसानों नें अपने खेतों पर खडे कोल्हू लगा लिए । गुड़ बनाकर बाजार में बेचा। नूरपुर क्षेत्र के कमाल अहमद, अजमल निसार कल्याण के अनुसार कोल्हू लगाने से दो फायदे हुए। एक तो मिलों पर गन्ना डालने की मारामारी से निजात मिली।

गुड़ बट्टा पर निगाह
बिजनौर। अब दूसरे सूबे के व्यापारियों की निगाह गुड़ बट्टा पर है। सहायक चीनी आयुक्त वर्मा के अनुसार खांडसारी बनाने वाली इकाई का सेकंड प्रोडक्ट शीरा होता है। शीरे से गुड़ बट्टा बनता है। गुड बट्टा आसवनी इकाइयों में प्रयुक्त होता है। उनका कहना है कि जिले में गुड़ बट्टा बनाने वाली इकाई कम हैं। बाहर के व्यापारी गुड़ बट्टा बनाने वाली इकाई से संपर्क कर रहे हैं। रेट अच्छे है। इसके अगले साल रिजल्ट अच्छे मिलेंगे।
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