खेत पर पहुंच कर टीम को जानकारी देते एजीएम आजाद सिंह व अन्य।
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धामपुर में धामपुर चीनी मिल की ओर से गन्ने के कुल क्षेत्रफल के करीब 40 प्रतिशत गन्ने का सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया है। शत प्रतिशत कार्य जून माह के अंत तक पूरा होना है। 77 टीमों को सर्वे कार्य में लगाया गया है। नई गन्ना नीति के तहत टीम में लगे सर्वेक्षकों की ओर से जोर दिया जा रहा है कि किसान स्वयं सर्वे के दौरान खेत पर मौजूद रहें और सर्वे स्लिप को अवश्य प्राप्त कर लें। ऐसा न किए जाने पर उन्हें आगामी गन्ना पेराई सत्र में दिक्कत हो सकती है।
धामपुर चीनी मिल की ओर से गन्ना क्षेत्रफल का सर्वे कराने के लिए 77 टीमों केे लगाया गया है। सर्वे कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ जीपीएस सिस्टम के माध्यम से खेतों पर जाकर किया जा रहा है। किस गांव में किस समय से सर्वे होगा, इसके बारे पहले से किसानों को जानकारी दी जा रही है। मिल अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान स्वयं खेत में जाकर सर्वे कराने के बाद सर्वे स्लिप को नहीं लेता है, तो गन्ना सट्टा बंद होने की स्थिति में वह स्वयं जिम्मेदार होगा। टीम या चीनी मिल ऐसे में उनकी कोई मदद नहीं करेगा। सर्वे कार्य पूरा करने के बाद प्रदेश के गन्ना आयुक्त को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद किसी प्रकार का संशोधन कराने की कंट्रोलिंग उन्हीं के पास होगी, किसी भी किसान की समस्या का निदान लखनऊ जाने पर ही होगा। ऐसे में उचित है कि वह स्वयं ही गन्ने का सर्वे ठीक प्रकार से करा सर्वे स्लिप को प्राप्त कर लें। सर्वे कार्य हरहाल में 30 जून तक पूरा होना है।
सात समितियों में 77 हजार किसान, 46 हजार हेक्टेयर रकबा
धामपुर। धामपुर चीनी मिल के एजीएम आजाद सिंह ने बताया कि धामपुर चीनी मिल में सात समितियों के गांवों के करीब 77 हजार सदस्य चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछले साल गन्ने का क्षेत्रफल 46 हजार हेक्टेयर था। इस बार कुछ कम होने के आसार लग रहे हैं। सर्वे में स्पष्ट हो रहा है कि इस बार किसानों ने अगैती प्रजाति 0238 की 99 प्रतिशत बुवाई की है। बाकी एक दो प्रतिशत अन्य प्रजाति का गन्ना है, लेकिन वह गन्ना भी अगैती प्रजाति का ही है। बताया कि सर्वे टीम की निगरानी की जा रही है। वह अचानक किसी भी गांव में पहुंच कर टीम की जांच कर रहे हैं। किसानों से वार्ता कर उनकी समस्या का मौके पर ही निदान कराया जा रहा है।
किसानों को अनुदान पर दी जा रही कीटनाशक दवाइयां
अधिकारियों ने बताया कि किसानों को गन्ने की खेती के प्रति रुझान बढ़ाने और अधिक पैदावार लेने को चीनी मिल की ओर से 50 प्रतिशत की छूट पर फफुंदी नाशक दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। जिन किसानों ने ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई की है, उन किसानों को 10 प्रतिशत की छूट पर कोराजन स्प्रे कराने के लिए उपलब्ध कराई जा रहा है। उन्होंने बताया कि भले ही गन्ने की फसल अभी खेतों में बढ़िया दिखाई दे रही है। लेकिन अगस्त और सितंबर माह में गन्ने की फसल में टॉप बोरर और पोक्काबोईंग रोग जरूर आता है। इन रोगों से फसल को मुक्ति दिलाने को 15 -15 दिन के अंतराल से दो बार फफुंदी नाशक और कोराजन का छिड़काव जरूर करें।