शहर में छोड़े गए तेज आवाज वाले पटाखे
बिजनौर। दीपावली पर कानफोड़ू पटाखों से आसमान गूंजता रहा। कामर्शियल क्षेत्र में पटाखों की आवाज मानकों से अधिक रही। तेज आवाज के पटाखे देर रात तक छूटते रहे। पटाखों की वजह से काफी ध्वनि प्रदूषण हुआ है।
शासन द्वारा ध्वनि के मानक निर्धारित किए गए हैं। ध्वनि के मानकों पर दीपावली पर छूट दी जाती है। अधिकतम 125 डीएसबी(डेसीबल) तक की आवाज के पटाखे छोड़े जा सकते हैं। दीपावली पर इसकी निगरानी के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग को जिम्मेदारी दी जाती है। ध्वनि मापने वाले यंत्रों से पटाखों की आवाज को मापा जाता है। दीपावली पर इस बार राम के चौराहे व जजी चौराहे पर पटाखों की आवाज मापने की व्यवस्था की गई थी। पटाखों की आवाज को मापने के लिए एक-एक दिन दोनों जगह मशीनें लगाई गई थीं। दोनों क्षेत्र व्यवसायिक क्षेत्र में आते हैं। यहां अधिकतम 55 डेसीबल ध्वनि वाले पटाखे तक छोड़े जा सकते थे। 26 अक्तूबर को जजी चौक पर अधिकतम 62.4 डेसीबल और 27 अक्तूबर को दीपावली पर राम के चौराहे पर 74.8 डेसीबल आवाज के पटाखे छोड़े गए।