फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वाइन फ्लू से लड़ने को स्वास्थ्य विभाग है असहाय

विज्ञापन
विज्ञापन
स्वाइन फ्लू से लड़ने में स्वास्थ्य विभाग है असहाय
विज्ञापन

बिजनौर। जिले में स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। करीब 40 लाख की आबादी वाले जिले में जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण मरीजों को हायर सेंटर की ओर रुख करना पड़ता है। जिले का स्वास्थ्य विभाग फिर भी इससे लड़ने के दावे करता है। सूत्रों का कहना है कि संक्रामक रोग विभाग केवल कागजों का पेट भरकर ही इससे पार पाने की बात करता है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक जिले में स्वाइन फ्लू के जिले में केवल दो केस मिल चुके हैं। इनमें से एक व्यक्ति की देहरादून में उपचार के दौरान मौत हो चुकी है, हकीकत इसके एकदम उलट है। अफसर दूसरी रोगी महिला को उपचार के बाद पूर्ण रूप से ठीक होने का दावा करते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इंफ्लुएंजा वायरस से फैलता है। मौसमी फ्लू के दौरान भी यह वायरस सक्रिय होता है। खांसते और छींकते समय हवा में या फिर जमीन पर थूक या मुंह से निकले द्रव कण गिरते हैं, तो वह वायरस की चपेट में आ जाता है। ये कण ही हवा के द्वारा किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिये प्रवेश कर जाते हैं। हालांकि सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक काफी ज्यादा बहती है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। यह सावधानी बेहद जरूरी है।
विज्ञापन

जानकारी है जरूरी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर ज्ञानचंद बताते हैं कि एच1एन1 वायरस स्टील और प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में आठ से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक सक्रिय रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए वाशिंग पाउडर, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण संक्रमण होने के बाद एक से सात दिन में विकसित हो सकते हैं।
विज्ञापन

टीम को कर दिया गया है अलर्ट
शासन की ओर जिले को इसके लिए अलर्ट कर दिया गया है। हैरत की बात ये है कि अलर्ट होने के बाद भी जिले में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा नहीं है। जब तक लोगों को इस बीमारी का पता चलता है, तब तक काफी देर हो जाती है। सीएमओ डाक्टर विजय कुमार यादव के अनुसार जिले में स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। टैमी फ्लू नामक दवा दी जाती है, जो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि रैपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) और क्वीक रेस्पांस टीम (क्यूआरटी) को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच की व्यवस्था नहीं है, लेकिन संदेह होने पर संभावित रोगी का सैंपल मेरठ भेजकर जांच कराई जाती है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
1. नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
2. मांसपेशियों में काफी दर्द या अकड़न महसूस करना।
3. सिर में भयानक दर्द होने के साथ तेज चक्कर आना।
4. कफ और कोल्ड होना, लगातार खांसी आना।
5. नींद न आना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
6. बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।
7. गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें