ब्लैक फंगस के मरीजों के परिवार को नहीं ढूंढ सका स्वास्थ्य विभाग
बिजनौर। जनपद के ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज दूसरे जिलों में इलाज करा रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अब भी जनपद में ऐसे केस मिलने से इंकार कर रहा है। बिजनौर जिले से कुछ दिन पूर्व ही ब्लैक फंगस से पीड़ित एक मरीज का मेरठ तो एक का गाजियाबाद के एक अस्पताल में उपचार चला। अभी हाल ही में बिजनौर के एक गांव के मरीज ने जयपुर में अपना इलाज कराया। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के रजिस्टर में ब्लैक फंगस के किसी भी मरीज की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई, जबकि कई प्राइवेट इएनटी और डेंटल सर्जन ऐसे केस मिलने का दावा कर रहे हैं। निजी चिकित्सकों की मानें तो अब तक जनपद में ब्लैक फंगस के एक दर्जन से अधिक मरीज आ चुके हैं। अभी तक इसकी स्वास्थ्य विभाग को इसकी खबर नहीं लगी। हालांकि इसका कारण प्राइवेट चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के बीच सामंजस्य न होना माना जा रहा है।
डेंटल सर्जन आशुतोष चौधरी ने बताया कि पिछले तीन चार दिन से ऐसे लक्षणों वाले मरीज उनके यहां पर आ रहे हैं। उन्हें लक्षणों के आधार पर हायर सेंटरों के लिए रेफर किया गया है। इनमें से एक मरीज के तो मुंह में ब्लैक कलर का लेजर बना था और बाएं गाल पर सुन्नपन था। वह पूरे होशोहवास में नहीं था। उसे बिना देरी किए हायर सेंटर भेज दिया गया। वहीं सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल ने बताया कि अभी तक जनपद में एक भी ब्लैक फंगस का मरीज नहीं मिला है। यदि वास्तव में जनपद में ब्लैक फंगस के मरीज मिले हैं, तो उनका पता कराकर उनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग कराई जाएगी। गाइडलाइन के अनुसार काला फंगस के मरीजों का उपचार इएनटी सर्जन, आई सर्जन, जनरल फिजीशियन और त्वचा रोग विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसके उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
बिना देरी किए शुरू कराएं उपचार
सुभाति हॉस्पिटल के संचालक एवं आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुभाष राणा के अनुसार जनपद में इस समय ब्लैक फंगस के मरीज मिलने लगे हैं। ऐसे में सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।
अभी तक संज्ञान में नहीं आया एक भी केस
जिला अस्पताल के डेंटल सर्जन डा. ओपी सिंह का कहना है कि अभी तक उनके पास इस प्रकार का कोई मरीज नहीं आया है और न ही इस प्रकार के लक्षणों वाले किसी मरीज की उनके पास कॉल आई।