नींदड़ू। झाड़-फूंक के चक्कर में सर्पदंश के शिकार उस्मान अहमद (36) पुत्र नफीस की जान चली गई। परिजन उसका अस्पताल में उपचार कराने के बजाए झाड़-फूंक के चक्कर में लग गए। पहले गिरजाघर और फिर सपेरों के पास ले गए। गढ़ और मेरठ तक दौड़ लगाई लेकिन युवक को बचाया नहीं जा सका। वहीं दस किलोमीटर की दायरे में नहटौर और नींदडू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सर्पदंश का इलाज मौजूद था।
मटोरा मान के पूर्व प्रधान फैयाज अहमद ने बताया कि गांव निवासी उस्मान अहमद बुधवार की सवेरे करीब साढ़े सात बजे घर के आंगन में बंधी भैंस के आसपास की सफाई कर रहा था। इसी दौरान वह एक छोटी लकड़ी उठाकर नाली का कूड़ा बाहर निकालने लगा। तभी नाली के बराबर की दीवार में छिपे बैठे सांप ने उसके दाहिने हाथ में दो जगह काट लिया। उसकी चीख-पुकार व सांप के काटने की बात सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे।
मोहल्ले के कई लोग भी वहां आ गए। परिजन आपस में कहते रहे कि सांप नाली के पानी में रहने वाला है। इसके काटने से कुछ नहीं होगा। उस्मान के बेहोश होने पर करीब डेढ़ घंटा बाद परिजन झाड़-फूंक व इलाज के लिए उसे राजा का ताजपुर के गिरजाघर में ले गए। वहां इलाज से मना करने के बाद पीड़ित को नूरपुर के अस्पताल और बाद में गढ़ व मेरठ के पास ले जाया गया। उसे सपेरों को भी दिखाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। बुधवार की रात करीब साढ़े दस बजे उस्मान का शव गांव लाया गया। शव देखकर परिवार में शोक फैल गया।
बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे उसके शव को कब्रिस्तान में दफना दिया गया। मृतक उस्मान का आठ वर्ष का एक बेटा है। करीब छह वर्ष पूर्व उस्मान की पत्नी अपने मायके चली गई थी। अब बेटे के लालन-पालन की जिम्मेदारी दादा नफीस पर आ गई है। अतहर निशात, अथर हुसैन और जियाउर्रहमान आदि का कहना है कि यदि मरीज को धामपुर या नहटौर पीएचसी ले जाया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी।
समय पर एंटी स्नेक वैनम लगने से बच जाती जान
नींदड़ू। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धामपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी अंकित कुमार ने बताया कि सांप के काटने पर मरीज के लिए पहला घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है। झाड़-फूंक से इलाज कराने या सपेरों के चक्कर में पड़ने की बजाए यदि रोगी को आधे या एक घंटे के भीतर किसी भी नजदीकी पीएचसी में ले जाया जाता है, तो समय रहते एंटी स्नेक वेनम लगने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। उस्मान के मामले में ऐसा नहीं हुआ, इसलिए उसकी मौत हो गई।