मंडावर। जिले में बुखार का कहर जारी है। कई मासूम भी बुखार की चपेट में आ गए हैं। शुक्रवार देर शाम राजारामपुर और बादशाहपुर गांव में बुखार पीड़ित दो मासूमों की मौत हो गई। जिले में बुखार से एक सप्ताह में दर्जनों मौतें हो चुकी हैं, जिससे लोग दहशत में है। अस्पतालों में बुखार के मरीजों की कतार लगी है।
जिले में बुखार का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालत इतनी गंभीर है कि शहर कस्बे के हरेक गली मोहल्ले में बुखार से लोग पीड़ित हैं। जिले में वायरल के अलावा डेंगू के लक्षण वाले मरीज भी मिल रहे हैं। गांव राजारामपुर में राजकुमार के 11 माह के बेटे तिपेश को शुक्रवार दिन में करीब दस बजे तेज बुखार आया था। बुखार के साथ उल्टी भी होने लगी।
परिजनों ने गांव के पास ही एक चिकित्सक को दिखाया, उसने दवा दी, लेकिन आराम नहीं मिला। परिजनों के अनुसार रात में करीब दस बजे तिपेश की हालत और अधिक बिगड़ गई।
परिजन उसे बिजनौर एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं गांव बादशाहपुर निवासी समर सिंह की ढाई माह की पुत्री मोनिका को मंगलवार से बुखार आ रहा था। परिजनों ने उसे भी एक चिकित्सक को दिखाया था। शुक्रवार देर शाम मोनिका की घर पर ही मौत हो गई। दोनों मासूमों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।
मंडावर में ढाई महीने क मोनिका की मौत डायरिया से हुई। जिन क्षेत्रों से बुखार से अधिक मरीज होने की जानकारी मिल रही है, विभाग स्तर से वहां टीमें भेजकर उनका उपचार कराया जा रहा है। बुखार पीड़ितों के इलाज को लेकर विभाग पूरा गंभीर है। लोगों को भी एतियात बरतनी चाहिए। - मनमोहन अग्रवाल, सीएमओ
अब तक हुई मौतें
13 सितंबर : पतराम सिंह -दयालवाला मंडावर
14 सितंबर : विशाल -अफजलगढ़
15 सितंबर: अंग्रेज-अफजलगढ़, आलमपुर गावड़ी हल्दौर के जयवीर
16- सितंबर : जुबैर- बेगराजपुर, प्रिंस -गंज
17 सितंबर : मौ. हसन हथाई शेख धामपुर,
18 सितंबर : प्रगति मंडावर -दिल्ली उपचार के दौरान मौत
बुखार से ढकौला में वद्ध की मौत
नहटौर। गांव ढकौला में बुखार की चपेट में आने से एक रिटायर्ड कर्मचारी की मौत हो गई। करीब 24 लोग बुखार से पीड़ित हैं। वृद्ध की मौत से ग्रामीणों में दहशत है। गांव ढकौला निवासी सीताराम 65 वर्ष पशुपालन विभाग से रिटायर्ड होकर अपने गांव में ही रह रहा था।
पिछले एक सप्ताह से वह बुखार की चपेट में आया हुआ था। निजी चिकित्सक के यहां उसका उपचार चल रहा था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे कोतवाली देहात में एक चिकित्सक के पास ले गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। बुखार से मौत होने पर ग्रामीणों में दहशत फैली हुई है।
सुरेश कुमार (47), संतो देवी (55), अदिति (11), आर्यन (6) , मोंगे (35), मदन (40), मीनाक्षी (12), नरपाल सिंह (38), रवि (12), सक्षम (13), वासु (11), आशु (11), सचिन (15), लकराज (47), मनमोहन सिंह(43) वर्ष सहित करीब 24 लोग बुखार से पीड़ित हैं। कई लोगों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
इससे पूर्व भी क्षेत्र में बुखार की चपेट में आने से पांच मौत हो चुकी है। चिकित्सा प्रभारी जीबी कटारिया का कहना है कि बुखार आने पर लापरवाही न बरतें। झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें। सीएचसी में बुखार से पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है।
बुखार के पैर पसारने से लोग खौफजदा
रेहड़। बुखार के पैर पसारने से ग्रामीण दहशत में हैं। स्वास्थ्य विभाग बुखार से बढ़ती मौतों को लेकर बेखबर हैं। सीएचसी और पीएचसी में उपचार नहीं मिलने के कारण मरीजों को उत्तराखंड के अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग बुखार से हुई मौत की घटनाओं की पुष्टि से इंकार कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार क्षेत्र में कोई मौत बुखार से नहीं हुई है।
गांव जाफराबाद में 35 वर्षीय महिला संतरेश पत्नी हरवंश की मौत हो गई। जबकि गांव हरकिशनपुर में वर्षा पत्नी हरवंश, मुस्कान पुत्री एहसान, मोहसिन पुत्र शरीफ बुखार से ग्रसित हैं। आरोप है सीएचसी और पीएचसी में दवा का टोटा है। दवा भी बुखार पर बेअसर साबित हो रही हैं।
ग्रामीण धर्मेंद्र, विनोद, सुभाष, ऋषिपाल ने बताया गांव में बुखार ने पैर पसार लिए हैं। ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों ने डीएम से जांच कर गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने की मांग की।
उधर, पीएचसी प्रभारी डॉ. रजनीश ने कहा मामला संज्ञान में नहीं है। फिर भी वो टीम गांव में भेजकर जांच कराएंगे। गंभीर मरीजों को नजदीक सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा।