बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग दिखाने को तो मानकों का अनुपालन करने के लिए लगातार दिशा निर्देश जारी करता है। मगर हकीकत में वह खुद ही निजी चिकित्सकाें को मनमानी का मौका दे रहा है।
विभाग की ओर से जिले के निजी चिकित्सकों को 30 अप्रैल तक नए पंजीकरण या नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस तिथि के बाद भी एक सप्ताह गुजर चुका है। इसके बावजूद अब तक जिले के आधे चिकित्सकों ने नवीनीकरण नहीं कराया है।
न ही स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों की सूची तैयार की है। जिले में 3500 से अधिक निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक पैथेलॉजी लैब, डायग्रोस्टिक सेंटर संचालित है।
इनमें एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डिग्री धारक चिकित्सक प्रैक्टिस कर रहे हैं। पंजीयन और नवीनीकरण की तिथि निर्धारित होने के बाद अब तक स्वास्थ्य विभाग ने यह ब्योरा भी नहीं जुटाया है कि कुल कितने संचालकों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है और इसके कारण क्या हैं।
माना जा रहा है कि विभाग के अधिकारी ही अप्रत्यक्ष रूप से निजी चिकित्सकों को मनमानी का मौका दे रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2015-16 में अप्रैल माह में करीब 900 चिकित्सक अपने पंजीकरण का नवीनीकरण से रह गए थे।
लेकिन विभाग पंजीकरण का रिनुअल न कराने वाले सभी चिकित्सकों को अभयदान दे दिया था। एक भी चिकित्सक ने अपने पंजीकरण का रिनुअल नहीं कराया। इस बारे में सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि रिनुअल करा चुके चिकित्सकों की सूची बनाई जा रही है।
जो चिकित्सक रिनुअल कराने से रह गए है, उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। कितने चिकित्सकों ने रिनुअल कराया, इसके बारे में वह पता करके बताएंगे।