फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor News: पाकिस्तान के स्कूलों में उर्दू अदब का ककहरा सीखा रहा ज्ञान चंद का लेखन

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञान चंद जैन की पुण्य तिथि पर
विज्ञापन

-पाकिस्तानी शिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल हैं ज्ञान चंद जैन की कईं किताबें

-मूल रूप से स्योहारा के मोहल्ला जैन स्ट्रीट के निवासी थे लेखक ज्ञान चंद

धर्मेंद्र भुईयार
स्योहारा (बिजनौर)। पाकिस्तान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल स्योहारा निवासी लेखक ज्ञान चंद्र जैन की किताबें छात्र-छात्राओं को उर्दू भाषा का ककहरा सीखा रही हैं। पड़ोसी मुल्क समेत उर्दू अदब की दुनिया में आज भी ज्ञान चंद्र जैन और उनके लेखन का खास मुकाम है। युवा पीढ़ी उनके उर्दू साहित्य के बल पर खुद को भाषा ज्ञान के क्षेत्र में तराश रही है। मजहब संग दो मुल्कों की सरहदों की बेड़ियां तोड़ने वाला उनका कालजयी लेखन आज हर किसी के लिए नजीर बना है।

उर्दू भाषा के विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञान चंद जैन का जन्म नगर के मोहल्ला जैन स्ट्रीट निवासी शाहू बहाल चंद जैन के घर 21 सितंबर 1923 को हुआ था। आरंभिक शिक्षा स्योहारा के एमक्यू इंटर कॉलेज में ही हुई। एमए उर्दू, डी लिट् तथा 1948 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू की नसरी दास्तांने विषय पर पीएचडी की।
विज्ञापन

प्रो. ज्ञान चंद जैन का नाम उर्दू समालोचना में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वे उर्दू के बेहतरीन भाषाविद, शायर और समालोचक थे। वर्ष 1982 में इनकी पुस्तक ज़िक्र-ओ-फिक्र के लिए उर्दू भाषा का साहित्य एकेडमी पुरस्कार का सम्मान मिला था। 1960 में आगरा विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें उर्दू मसनवी शुमाली हिन्द के लिए अवार्ड दिया गया।
हमीदिया काॅलेज भोपाल, उस्मानिया विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केन्द्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद में डीन रहे। प्रो ज्ञान चंद जैन ने ग़ाफ़िल उपनाम से शायरी भी की। इन्हें इनकी साहित्यक सेवाओं के लिए 2002 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन

110 से अधिक किताबें लिखीं
डा. ज्ञानचन्द जैन ने उर्दू इंग्लिश, हिंदी साहित्य में उन्होंने 110 से अधिक किताबें लिखीं। आम लिसानियात, उर्दू की नसरियात, एक भाषा दो लिखावट दो अदब, कच्चे बोल, हकीक, लिसानी मुताले, कच्चे बोल, अदबी इज़ाफ़, गालिब शनास मालिक राम, खोज, परख और पहचान, इब्तदाई कलाम ए इकबाल, तफ़्सीर ए ग़ालिब, उपेंद्र नाथ अश्क, हकीक ए फन आदि पुस्तकें लिखीं। आज भी देश के उर्दू स्नातकोत्तर व पीचडी और पाकिस्तान में उर्दू के सभी विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में इनकी लिखी किताबें पढ़ाई जाती हैं। ज्ञानचंद जैन पर अनेक स्कॉलर्स ने पीएचडी की है।
अमेरिका में हुआ निधन
अपने अंतिम समय में वे स्मृति लॉस तथा पार्किंसन बीमारी से ग्रस्त रहे। 11 अगस्त 2007 में कैलिफोर्निया अमेरिका में उनका निधन हो गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें