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Bijnor News: बढ़ती उम्र दे रही दर्द, पल-पल भूल रहे बीता हुआ लम्हा

Sun, 21 Sep 2025 12:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर। हर उम्र में बीमारी का खतरा है लेकिन बढ़ती उम्र बीमारी के साथ दर्द भी देती है। अल्जाइमर पीड़ित लोग उम्र बढ़ने के साथ पल-पल अपना बीता हुए लम्हा भूल रहे हैं। मेडिकल अस्पताल में भी अल्जाइमर से ग्रसित के हर महीने 10 मरीज तक पहुंच रहे हैं।
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विश्व अल्जाइमर दिवस 21 सितंबर को मनाया जा रहा है। अल्जाइमर बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारी है। इसमें व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति चौहान बताती हैं कि अल्जाइमर में बीटा-एमायलॉइड प्लेट्स और टॉ टेंगल्स मस्तिष्क में जमा हो जाते हैं। ये असामान्य प्रोटीन न्यूरॉन्स के बीच संदेश पहुंचने में बाधा डालते हैं। जिसके चलते धीरे-धीरे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा आनुवंशिक कारण में कुछ जीन अल्जाइमर के जोखिम को बढ़ाते हैं। विशेष रूप से एपोलिपोप्रोटीन ई (एपो ई) जीन लेट-ऑनसेट अल्जाइमर के लिए जोखिम बढ़ाता है। अल्जाइमर के लिए पर्यावरणीय और जीवनशैली में परिवर्तन भी इसका कारण है।
इन लोगों को भी अल्जाइमर का ज्यादा खतरा
अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति की स्मृति, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा के कार्यों को प्रभावित करती है। इसका खतरा उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मस्तिष्क की चोट लगने वाले लोगों को ज्यादा है।
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अल्जाइमर के लक्षण
-स्मृति का धीरे-धीरे कम होना
-साधारण कार्यों को पूरा करने में कठिनाई
-मूड और व्यवहार में बदलाव
-व्यक्तित्व में परिवर्तन और भ्रम
-बोलने में दिक्कत होना

ऐसे कर सकते हैं बचाव

-पढ़ाई-लिखाई सहित नए कौशल सीखें

-शतरंज खेलना

-मस्तिष्क को चुनौती देने वाले कार्य करें

-दोस्तों, परिवार के साथ ज्यादा समय बिताएं

-सामाजिक गतिविधियों में शामिल हों

-चिकित्सक से परामर्श लें

केस नंबर एक

बिजनौर निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग को अल्जाइमर हो गया है। बार-बार खाना मांगते हैं। उन्हें यह ध्यान नहीं रहता है कि उन्होंने खाना खा लिया। सामान बैग में रखकर कमरे में रखते हैं। बाद में अपना सामान ढूंढते हैं।
केस नंबर दो

बिजनौर निवासी 83 वर्षीय महिला घर से बाहर चली जाती हैं। बाद घर का रास्ता भूल जाती हैं। परिवार के दूसरे सदस्य उन्हें घर लाते हैं। पिछले कुछ सालों में परिवार के लोगों का चेहरा भी भूलने लगी हैं।
तंत्रिका-संज्ञानात्मक विकार में सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है, यही अल्जाइमर है। डिमेंशिया और अल्जाइमर से पीड़ित लोगों के लिए समय पर निदान और उपचार बहुत जरूरी है। दवाइयों के सेवन से अल्जाइमर का प्रभाव देरी से होता है। इसलिए तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
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- डॉ. प्रीति चौहान, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल, बिजनौर
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