आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर, राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इस बीच, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को जानने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है। इसी कड़ी में टीम ने बिजनौर जिले का दौरा कर सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े प्रभाव और विकास के दावों की पड़ताल की।
मेडिकल कॉलेज से स्वास्थ्य सुविधाओं को मिली रफ्तार
बिजनौर के महात्मा विदुर ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसरों और छात्रों से हुई बातचीत से स्वास्थ्य सेवाओं में आई बेहतरी की तस्वीर साफ हुई। असिस्टेंट प्रोफेसर अमित गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में वे सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में होनी चाहिए। मरीजों के हित में भी बेहतर कार्य हो रहे हैं। पहले जिले के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या मेरठ जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने शहर में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। यह जिले के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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ऐतिहासिक विदुर कुटी का कायाकल्प, सरकारी प्रयासों से पर्यटन को मिल रही नई पहचान
सरकारी प्रयासों से बिजनौर की ऐतिहासिक विदुर कुटी में भी व्यापक सुधार हुआ है। मुख्य पुजारी ने बताया कि एक समय था जब यह इलाका सुनसान और वीरान था, जहां दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं देता था। सरकार बदलने के साथ ही यहां सौंदर्यीकरण के कार्य हुए, जिसके चलते अब दूर-दूर से लोग यहां आने लगे हैं। पहले भले ही इसे कम लोग जानते थे, लेकिन अब विदुर कुटी काफी चर्चा में है और बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। शौचालयों और ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। एक श्रद्धालु ने भी बताया कि विदुर कुटी का दर्शन करने आने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे प्राचीन सभ्यता से जुड़े इस स्थल को नई पहचान मिली है।
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नगीना की वुड वर्क कला को मिली नई पहचान, ओडीओपी में शामिल हुई विलुप्त होती कारीगरी
नगीना की प्रसिद्ध वुड वर्क (लकड़ी के काम) कला को 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने से इसे नई संजीवनी मिली है। नगीना के इरशाद अली मुल्तानी ने बताया कि यहां लकड़ी के छोटे-छोटे उत्पाद बड़ी संख्या में बनाए जाते हैं और अब ये उत्पाद विदेशों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा इसे ओडीओपी में शामिल किए जाने के बाद ऋण प्राप्त करना आसान हो गया है। 25 लाख रुपये तक के ऋण पर 25% की सब्सिडी मिल रही है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंकों ने भी पहले की तुलना में अब आसानी से ऋण उपलब्ध कराए हैं, जिससे इस पारंपरिक कला को बढ़ावा मिला है और कारीगरों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
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