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वेंटिलेटर तो मिल गए, पर इन्हें चलाएगा कौन

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बिजनौर जिला अस्पताल के कोविड आईसीयू में लगा पोर्टेबल वेंटिलेटर। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। जहां एक ओर प्रदेश भर में कोरोना के मरीजों के लिए वेंटिलेटर की मारामारी मची है, वहीं दूसरी ओर बिजनौर में वेंटिलेटर तो है, लेकिन आज तक इन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिले। जिला अस्पताल स्थित 98 बेड वाले कोविड एल-2 विंग के आईसीयू वार्ड में लगे इन चार पोर्टेबल वेंटिलेटर का अभी तक एक बार भी प्रयोग नहीं हुआ। अफसरों की मानें तो वर्तमान में ये चालू अवस्था में तो हैं, मगर कार्डियोलॉजिस्ट और एनेस्थेसिया आदि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण इन्हें चला नहीं पा रहे हैं और मरीजों को हालत बिगड़ने पर मुरादाबाद रेफर कर दिया जाता है।
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वर्तमान मेें कोरोना संक्रमण फिर से जोर मारने लगा है। इस बार यह पहले से भी अधिक तीव्रता से फैल रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार और सरकारी अमला तरह तरह के प्रयास कर रहा है। एक ओर प्रदेश भर में अस्पतालों में बैड और वेंटिलेटर की किल्लत हो गई है, तो वहीं दूसरी तरफ जनपद बिजनौर की स्थिति इसके एकदम उलट है। वर्तमान में हालत ये है कि 15 अप्रैल तक आए कुल 5263 मरीजों में से किसी को भी वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी। इनमें से कुल सक्रिय 663 मरीजों में से मात्र 26 ही कोविड एल-2 विंग में भर्ती हैं, जबकि शेष सभी होम आइसोलेशन में हैं। यदि कोई गंभीर मरीज रहा तो उसे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद में बने कोविड हॉस्पिटल में भेजा जाता है। वर्तमान में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में केवल डॉ. एफसी वर्मा ही एनेस्थिसिया हैं। जबकि दोनों अस्पतालों के लिए चार पद स्वीकृत हैं। उधर करीब 14 वर्षों से हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) नहीं हैं।
भविष्य की तैयारी हैं ये वेंटिलेटर: सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर आगामी परिस्थितियों के लिए लगाए गए हैं। हो सकता है जब मेडिकल कॉलेज का विस्तार होगा तो विशेषज्ञ चिकित्सक और प्रशिक्षित पूरा स्टाफ मिलेगा। तब ये पूरी तरह से संचालित होने लगेंगे।
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