किरतपुर। नगर के तलहा मकरानी ने सालों तक किरतपुर रेलवे स्टेशन पर धरना देकर लखनऊ-चंडीगढ़ सद्भावना एक्सप्रेस का स्टॉपेज किरतपुर में कराया। 2014 में युवा अधिवक्ता ने ट्रेन के स्टॉपेज और क्षेत्रीय जनता की सुविधा के लिए सत्याग्रह शुरू करने का एलान किया था। अब तलहा मकरानी अपने अगले मिशन गढ़वाल एक्सप्रेस के स्टॉपेज की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। सोमवार को उनके धरना प्रदर्शन का 173वां सप्ताह था।
किरतपुर से होकर जाने वाली लखनऊ चंडीगढ़ सद्भावना एक्सप्रेस का स्टॉपेज यहां न होने से क्षेत्रवासियों को परेशानी उठानी पड़ती थी। 2014 में किरतपुर के युवाओं की एक बैठक में युवा वकील तलहा मकरानी नेे जन सहयोग से सद्भावना एक्सप्रेस के स्टॉपेज हेतु सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। तलहा मकरानी ने संकल्प अभियान समिति का गठन किया और उसके संयोजक बने। ट्रेन का स्टॉपेज होने तक रेलेवे स्टेशन पर प्रत्येक रविवार को सांकेतिक धरना देते रहने का निर्णय लिया गया। समिति ने 12 अक्तूबर 2014 को पहला धरना दिया। आंदोलन के दौरान तलहा मकरानी ने न केवल हस्ताक्षर अभियान चलाया। बल्कि करीब 50 हजार पत्र लिखवाकर रेल मंत्रालय को भिजवाए।
भाजपा सांसद डॉ. यशवंत सिंह इस मामले को लेकर कई वार बड़ोदरा हाउस दिल्ली जाकर रेलवे के बड़े अधिकारियों मिले। ट्रेन स्टॉपेज के लिए एकमात्र बिजनेस टिकट बिक्री को आधार मानने वाले रेल विभाग से सद्भावना एक्सप्रेस का स्टॉपेज लेना आसान नहीं था। वर्षों तक आंदोलन चलाने वाले तलहा मकरानी एक समय बिल्कुल अकेले पड़ गए थे।
उन्होंने करीब 52 सप्ताह तक स्टेशन पर धरना दिया। 24 मार्च 2015 को रेलवे पारामर्शद्रात्री समिति के सदस्य सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु से बातचीत की। छह अप्रैल 2015 को रेलमंत्री ने स्टॉपेज की छह माह के ट्रायल बेस पर स्वीकृति दी। आठ अगस्त 2015 को रेल विभाग ने किरतपुर स्टेशन पर सद्भावना एक्सप्रेस का अप डाउन का ट्रायल बेस पर स्थापित करा दिया। इस प्रकार तलहा मकरानी के अथक प्रयास से किरतपुर को 35 वर्षों बाद किसी एक्सप्रेस के यहां रुकने की सौगात मिली। बाद में समुचित बिजनेस मिलने पर विभाग ने स्टॉपेज को स्थायी कर दिया। अब तलहा मकरानी अपने अगले मिशन गढ़वाल एक्सप्रेस के स्टॉपेज की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। रविवार को उनके धरना प्रदर्शन का 173वां सप्ताह था।
सांसद भी नहीं दिला पाए स्टॉपेज
किरतपुर रेलवे स्टेशन की स्थापना 1932 में हुई थी। 1980 तक यहां दिल्ली देहरादून मसूरी एक्सप्रेस ट्रेन का स्टॉपेज था। यह ट्रेन यहां से रोजाना गुजरती तो है, लेकिन रुकती नहीं। 1986 में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार बिजनौर से सांसद चुनी गईं। उस समय केंद्र और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। जनता की मांग पर मीरा कुमार ने यहां मसूरी एक्सप्रेस को रुकवाने के काफी प्रयास किया मगर ट्रेन यहां नहीं रुकी। 23 अगस्त 1998 को मसूरी एक्सप्रेस के स्टॉपेज की मांग को लेकर भाजपा नेता स्व. विपिन गोयल के नेतृत्व में नगर क्षेत्र की जनता ने छह घंटे तक रेलवे स्टेशन के सामने रेलवे ट्रैक पर जाम लगाकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। मगर ट्रेन का स्टॉपेज नहीं हो पाया। तब केंद्र, प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इसके बाद वर्ष 1994-95 में शुरू हुई लखनऊ एक्सप्रेस का स्टॉपेज भी यहां नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2006 में कोटद्वार से दिल्ली के बीच गढ़वाल एक्सप्रेस शुरू हुई।
आठ महीने के बेटे को ले गए धरने पर
सद्भावना एक्सप्रेस के स्टॉपेज के लिए संकल्प अभियान आंदोलन के तहत युवा अधिवक्ता तलहा मकरानी के सामने इस दौरान ऐसा वक्त भी आया जब तलहा मकरानी अकेले रह गए। तब उन्होंने धरने पर अपने मात्र आठ माह के बेटे सुल्तान यूसुफ को अपने साथ धरने पर लाना शुरू कर दिया था। तलहा मकरानी के अनुसार अगर ट्रेन स्टेशन से गुजर जाए तो उसके होने न होने का क्या फायदा। उनके आंदोलन से जनता को फायदा हुआ है। वे बाकी ट्रेनों का स्टॉपेज भी किरतपुर रेलवे स्टेशन पर कराकर रहेंगे।