बिजनौर। परिषदीय विद्यालयों की छात्राएं अब केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बौद्धिक खेलों में भी जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। शतरंज जैसे दिमागी खेल में परिषदीय स्कूलों की बेटियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव हो रहा है।
जनपद के 2119 परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को शतरंज का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले जहां परिषदीय स्कूलों का नाम आते ही शिक्षा और खेल में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, वहीं अब यही विद्यालय प्रतिभाओं की पहचान बन रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय सकतलपुर मिलक की छात्रा कशिश और मिताली ने राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले को गौरवान्वित किया है। यह प्रतियोगिता 11 जनवरी से रांची (झारखंड) में आयोजित हुई थी। खास बात यह रही कि जिले के परिषदीय विद्यालयों की छात्राएं पहली बार राष्ट्रीय स्तर की शतरंज प्रतियोगिता में पहुंचीं।
जिला शतरंज संघ के सचिव दुष्यंत कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों की रुचि अब तेजी से खेलों की ओर बढ़ रही है और शतरंज जैसे खेलों से उनकी एकाग्रता व बौद्धिक क्षमता का विकास हो रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। इसके साथ ही छात्र-छात्राएं शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों में भी महारथ हासिल कर रहे हैं। कशिश और मिताली की उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।