कोतवाली देहात। विकासखंड की ग्राम पंचायत कृतो नंगली उर्फ पैहरूवाला में बना एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र में चालू नहीं हो पाया है। यहां रीसाइक्लिंग होने वाला कूड़ा पहुंचाया ही नहीं जाता। इसके चलते लाखों रुपये की लागत से बना कूड़ाघर खाली पड़ा हुआ है। केंद्र पर खाद के गड्ढे भी खाली पड़े हुए हैं। गांव से निकलने वाले कूड़े को गड्ढों में डालने के बजाए सड़कों के किनारे इधर-उधर फेंका जा रहा है।
विकास खंड कोतवाली की ग्राम पंचायत कृतो नंगली उर्फ पैहरूवाला में कई वर्ष पूर्व एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (कूड़ाघर) का निर्माण हुआ था। इसमें बने गड्ढों में कूड़ा डालने की व्यवस्था की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार यहां सूखे तथा गीले कूड़े को अलग करने के बाद रीसाइक्लिंग कर उपयोगी बनाने की योजना थी। कूड़े से निकले उपयोगी सामान को बेचकर तथा यहां खाद तैयार कर आमदनी बढ़ानी थी। ज्यादातर कूड़ाघरों में रीसाइक्लिंग लायक कूड़ा पहुंचा ही नहीं। इसके चलते कूड़ा निस्तारण केंद्र शोपीस बन गए हैं।
ग्रामीण शिवपाल सिंह ने बताया कि गांव में कूड़ा उठाने के लिए ग्राम पंचायत की ठेली घूमती है। वह नालियों से निकला कीचड़ वाला कूड़ा उठकर ले जाते हैं। साथ ही काफी ग्रामीण घरों का कूड़ा भी ठेली में डाल देते हैं, लेकिन कूड़े में प्लास्टिक, कांच आदि की वस्तुएं न के बराबर होती हैं जिसके चलते कूड़ाघर में रीसाइक्लिंग के लिए पर्याप्त मात्रा में कूड़ा नहीं पहुंचता है।
ग्रामीण हरिराज सिंह ने बताया कि गांव में आए दिन कबाड़ खरीदने वाले लोग आते हैं जो प्लास्टिक और कांच के सामान की कीमत देते हैं। ऐसे में लोग प्लास्टिक आदि की बेकार वस्तुएं कबाड़ी को बेच देते हैं। जब तक ठोस कूड़ा नहीं आएगा तब तक कूड़ा निस्तारण केंद्र पर काम शुरू नहीं हो पाएगा।
ग्राम प्रधान जितेंद्र सिंह ने बताया कि कूड़ाघर में प्लास्टिक का थोड़ा सामान आया था लेकिन इतनी वस्तु नहीं आ पाईं कि कूड़ा निस्तारण केंद्र में काम शुरू किया जा सके।
एडीओ पंकज शर्मा ने बताया कि विकास खंड में कई कूड़ा निस्तारण केंद्र बेहतर काम कर रहे हैं। कई स्थानों पर कचरा कम मिलने के कारण कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसके लिए प्रयास कराए जा रहे हैं।