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जैविक खेती से जुड़ेंगे गंगा के तटीय गांव

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जैविक खेती से जुड़ेंगे गंगा के तटीय गांव
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- 22 गांवों के किसानों को कानपुर में दिलाया जाएगा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गंगा किनारे के गांवों में किसानों को गो आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। किसान गोवंश के गोबर व मूत्र को खेती में कीटनाशक और खाद के रूप में प्रयोग करेंगे। इसके लिए गंगा किनारे बसे सभी 22 गांवों के किसानों को कानपुर में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। किसान आज मंगलवार को कानपुर रवाना होंगे।
गंगा की धारा को निर्मल बनाने के लिए सरकार अनेक प्रयास कर रही है। 27 जनवरी से प्रदेश में गंगा यात्रा निकाली जानी है। बिजनौर के गांव सबलगढ़ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गंगा यात्रा का शुभारंभ कर सकते हैं। प्रदेश के 27 जिलों में गंगा बहती है, जो 1028 गांवों से होकर निकलती है। गंगा किनारे के गांवों में किसान खेती करते हैं। जिले के भी 22 गांव गंगा किनारे बसे हैं। किसान खेतों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का अंधाधुंध प्रयोग करते हैं। इनके प्रयोग से गंगा का जल, वहां की वायु व भूमि प्रदूषित होती है। इसे रोकने के लिए किसानों को गो आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। गो आधारित प्राकृतिक खेती में किसान गोवंश के गोबर व मूत्र को खाद व कीटनाशक के रूप में प्रयोग करेंगे। खेतों में रासायनिक उर्वरकों का बिल्कुल प्रयोग नहीं किया जाएगा।
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इसके लिए गांव सेफपुर से जसवंत सिंह, मोहिउद्दीनपुर से नागेंद्र सिंह, जहानाबाद के राजेश कुमार, खलीउल्लापुर के सुखलाल, कुंदनपुर के इफ्तेकार, टीप के संदीप, सुजातपुर खादर के सतपाल सिंह, बसंतपुर के जबर सिंह, दत्तियाना के रोहिताश, गौंसपुर के तिलकराम, हेमराज कॉलोनी के दीपक कुमार, रावली के राजेंद्र सिंह, बादशाहपुर के ताराचंद्र, तैय्यबपुर काजी के टीकम सिंह, दयालवाला के जितेंद्र कुमार, कुंवरपुर चतरभोज के जय सिंह, निजामतपुरा गंज के नरेश सिंह, प्रकाश सिंह, जहानाबाद के बलवंत सिंह, लखपतनगर के प्रमोद कुमार, सबलगढ़ के चमन सिंह, रसूलपुर पित्तनका के अमीशरण को चयनित किया गया है।
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वैज्ञानिक देंगे किसानों को प्रशिक्षण
चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी कानपुर कृषि वैज्ञानिकों के अलावा वे किसान गो आधारित खेती के बारे में बताएंगे जो कई सालों से इस तरह की खेती कर रहे हैं। खेतों में पेस्टीसाइट, रासायनिक खाद न जाने से गंगा की धारा भी निर्मल बनी रहेगी। आत्मा परियोजना निदेशक योगेंद्रपाल सिंह योगी किसानों को लेकर जाएंगे। उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी के अनुसार सभी किसानों को प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए। जैविक खेती से आमदनी बढ़ेगी और खेती की लागत कम होगी। साथ ही ये फसल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
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