नवंबर में भी खेतों में कटान कर रही गंगा
मंडावर। बारिश खत्म हुए दो महीने से ज्यादा का समय होने के बाद भी गंगा की धारा खादर में कहर बरपा रही है। गंगा की धारा गांव सीमली व मीरापुर के बीच गंगा की धारा कटान कर रही है। यह स्थिति तब है जबकि नवंबर में गंगा की धारा में बहुत कम पानी चलता है। किसानों ने प्रशासन से गंगा के कटान से निजात दिलाने की मांग की है।
उत्तराखंड के पहाड़ों पर होने वाली बारिश जिले के मैदान में कहर बरपाती है। बरसात का पानी गंगा में मिलकर खादर में आता है। जलस्तर बढ़ने से पानी तटीय गांवों के किसानों के खेतों की मिट्टी को काटकर बहा देता है। इस बार भी काफी जमीन कट गई। अगस्त में बारिश बंद होने के बाद से ही गंगा की धारा में पानी भी बहुत कम हो गया था। लेकिन कम पानी भी किसानों के खेतों में कटान कर रहा है। गंगा का पानी खेतों से काफी नीचे है लेकिन धारा धीरे-धीरे कटान कर रही है। नीचे से कटान होने पर ऊपर की मिट्टी अपने आप नदी में समा जाती है।
गंगा के कटान को देखते हुए किसान खेतों में खड़ी फसल काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि गंगा ने यहां पर साल 2012 में कटान किया था। इसके बाद से कटान बंद था। आमतौर पर गंगा की धारा बारिश बंद होने के बाद तट से काफी दूर चली जाती है। लेकिन इस बार धारा तट के खेतों से ही सटकर चल रही है। इससे तेजी से कटान हो रहा है। कुलदीप, नीतू, सिराजुद्दीन, शौकिन, उदयवीर, पुष्पेंद्र, गजराज सिंह, सुखराम सिंह, पंकज, दलवीर सिंह आदि किसानों का कहना है कि गंगा के कटान से उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर प्रशासन ने कटान रोकने के लिए जल्दी कदम नहीं उठाए तो खेत और फसल कटकर गंगा में समा जाएंगे। अफजलगढ़ सिंचाई खंड के एक्सईएन रामबाबू का कहना है कि इस मामले में प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन की स्वीकृति मिलने पर कटान निरोधी कार्य कराया जाएगा। करीब 550 मीटर में काम कराया जाएगा।