खादर में खेतों की ओर कटान कर रही गंगा
मंडावर (बिजनौर)। खादर में गंगा का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। गंगा लगातार गांव रामसहायवाला की ओर कटान करते हुए बढ़ रही है। गंगा के रौद्र रूप से घबराए गांव वाले तटबंध के पास कटान को रोकने के लिए पेड़ व झाड़ी काटकर डाल रहे हैं, लेकिन गंगा का इस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। गंगा पेड़ों को अपने साथ तिनके की तरह बहाकर ले जा रही है। गंगा की धारा में शनिवार रात मां काली का मंदिर भी कटकर समा गया है।
गंगा की धारा के दूसरी ओर बसे गांव रामसहायवाला को उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए तटबंध से बाढ़ व कटान से राहत मिलती थी। लेकिन अब गंगा कई दिनों से गांव की ओर तेजी से कटान कर रही है। गंगा अब गांव से केवल 200 मीटर दूर ही रह गई है। तटबंध में करीब 600 मीटर तक गंगा तेजी से कटान कर रही है। तटबंध से आगे गंगा का कटान खेतों में भी हो रहा है। किसानों के खेत फसल सहित कटकर गंगा की लहरों में बह रहे हैं। गंगा के रौद्र रूप को देखकर गांव वालों की सांसें अटकी हुई हैं। तटबंध के पास गांव वालों ने तीन मंदिर बना रखे थे। इनमें से दो मंदिर एक सप्ताह पहले कटान की वजह से गंगा में समा गए थे। केवल काली माता का मंदिर बचा था। शनिवार रात तेज कटान में काली माता का मंदिर भी गंगा में बह गया। गंगा के प्रकोप से गांव को बचाने के लिए गांव वाले खुद ही हाथ-पैर मार रहे हैं। कटान वाले क्षेत्रों में गांव वाले बड़े पेड़ व झाड़ी काटकर डाल रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से गंगा की लहरों के थपेड़े तटबंध की ढांग के बजाए पेड़ों से टकराएंगे तो कटान नहीं होगा। लेकिन गांव वालों की ये कोशिश भी बेकार जा रही है। गंगा की लहरों में पेड़ तिनके की तरह बह रहे हैं। इसके अलावा 600 मीटर दूर तक पेड़ काटकर डालना भी संभव नहीं है। रविवार को हरिद्वार के सिंचाई विभाग के जेई दीपक कुमार ने तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने कटान वाले क्षेत्र में खुद जाकर देखा। दीपक कुमार ने गांव वालों से कहा कि सोमवार से तटबंध के कटान को रोकने के लिए पत्थर व रेत के बोरे लगाए जाएंगे। वहीं ग्राम प्रधान श्यामबहादुर ने फोन पर उत्तराखंड के शासन के अधिकारियों से बात की और कटान की स्थिति के बारे में बताया। शासन के अधिकारियों ने गांव वालों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में वर्षा से नदियों का जलस्तर बढ़ा
भागूवाला/नजीबाबाद। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में वर्षा के चलते क्षेत्रीय नदियों का जलस्तर बढ़ गया। कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ने से भारी वाहनों को कोटावाली रपटे से आवागमन ठप हो गया। पुलिस ने भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कर उन्हें गंतव्य के लिए रवाना किया।
पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में शनिवार को हुई मानसूनी वर्षा से मालन, लकड़हान, सूखा, रतनाल, कोटावाली नदी सहित क्षेत्रीय नदियों का जलस्तर बढ़ गया। रविवार को प्रात: 10 बजे कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़कर कोटावाली रपटे से बहने लगा। भारी वाहनों ने जोखिम उठाकर कोटावाली रपटा पार किया। मंडावली थानाध्यक्ष संदीप त्यागी के निर्देशन में पुलिस ने भारी वाहनों को रपटे के छोर पर रोक दिया। पुलिस ने भागूवाला-पूर्वी गंगनहर चंदक हेड बाईपास मार्ग से रोडवेज, मैक्स सहित भारी वाहनों का रूट डायवर्ट किया, जिससे भारी वाहनों का नजीबाबाद-हरिद्वार से सीधा संपर्क टूट गया। भारी वाहनों को रूट डायवर्जन से लगभग छह-सात किमी की अतिरिक्त दूरी तय करके गंतव्य के लिए जाना पड़ा।
उधर मालन, लकड़हान, सूखा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी तटीय क्षेत्र पर बसे लोगों की चिंता बढ़ गई। हालांकि जल्द ही नदियों का बढ़ा जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा। कोटावाली नदी का जलस्तर दोपहर दो बजे कम होने और कोटावाली रपटे से पानी उतरने के बाद पुलिस ने भारी वाहनों के लिए रपटा मार्ग खोल दिया।
कई बार ठप हो चुका है भारी वाहनों का आवागमन
नजीबाबाद-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर भागूवाला क्षेत्र में कोटावाली नदी पुल में 2017 में तकनीकी खराबी आ गई थी। सेतु निगम के अधिकारियों ने पुल की जांच कर पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। पुल निर्माण कंपनी ने कोटावाली नदी पुल के समानांतर नदी क्षेत्र में रपटे का निर्माण कर भारी वाहनों को नजीबाबाद-हरिद्वार से सीधा संपर्क जोड़ा। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में भारी वर्षा के चलते कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़कर रपटे के ऊपर गुजरने पर प्रशासन को सुरक्षा की दृष्टि से भारी वाहनों का आवागमन रोकना पड़ता है। मानसूनी वर्षा में कई बार कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ने पर भारी वाहनों को रूट डायवर्जन से परेशानी झेलनी पड़ी है। भारी वाहन चालकों ने शासन-प्रशासन से कोटावाली नदी पुल की तकनीकी खामियां दूर करने की मांग करते हुए पुल से भारी वाहनों का आवागमन शुरू कराने की मांग की है।