बिजनौर में विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बगापत करके चुनाव लड़े पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव समेत चार नेताओं को पार्टी हाईकमान ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बताया जाता है कि चुनाव के बाद ये नेता फिर से भाजपा में शामिल होने की जुगत में थे।
विधानसभा चुनाव में बढ़ापुर सीट से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह ने बगावत का बिगुल बजा दिया था। वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद गए थे। उधर, जिला पंचायत सदस्य राधा र्सैनी भी बढ़ापुर सीट से टिकट की दावेदार थीं। उन्होंने भी पार्टी से बगावत करके रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। नजीबाबाद सीट से लीना सिंघल भाजपा का टिकट मांग रही थीं। राजीव अग्रवाल को पार्टी का टिकट मिलने के बाद लीना सिंघल रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। उधर, बिजनौर सीट से पूर्व आईएएस अफसर एसके वर्मा भाजपा का टिकट मांग रहे थे। भाजपा ने सुचि चौधरी को टिकट दिया। इसके बाद एसके वर्मा नाराज होकर रालोद में चले गए। वे चांदपुर सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए।
बगापत करने वाले सभी नेताओं की रिपोर्ट चुनाव के बाद ही जिलाध्यक्ष राजीव सिसौदिया ने पार्टी हाईकमान को दे दी थी। चुनाव के बाद इन नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार रात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने चारों नेताओं को पार्टी से निकालने का ऐलान किया। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद बगावत करने वाले काफी नेता फिर से पार्टी में शामिल होने का रास्ता ढूंढ रहे थे। एंट्री बंद होने के कारण इनकी वापसी नहीं हो पा रही थी। भाजपा के जिलाध्यक्ष राजीव सिसैदिया ने पूर्व विधायक डा. इंद्रदेव सिंह समेत चारों नेताओं को भाजपा से निकालने की पुष्टि की है।