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डेंगू से एक, बुखार से बच्चों समेत तीन की मौत

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राजा का ताजपुर में बुखार से पीड़ित। - फोटो : BIJNOR
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राजा का ताजपुर/ हीमपुरदीपा। बुखार व डेंगू से जिले में एक ही दिन में दो बच्चों सहित चार की मौत हो गई। इनमें से एक युवक डेंगू से पीड़ित था। जिले में अब भी बड़ी संख्या में जिलेवासी बुखार से पीड़ित हैं। निजी चिकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़ लगी हुई है। एक बैड पर दो दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया जा रहा है।
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हीमपुरदीपा क्षेत्र के गांव उलेढ़ा गांव निवासी 34 वर्षीय रणवीर सिंह पुत्र तेजपाल सिंह को पिछले सात दिनों से बुखार आ रहा था। उसे जिला मुख्यालय पर एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया था। तीन दिन पहले डेंगू की पुष्टि होने पर रणवीर सिंह को मेरठ रेफर कर दिया गया था। वहां भी हालत में सुधार न होने पर रणवीर को सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में भर्ती किया गया, जहां शनिवार शाम उसने दम तोड़ दिया। रणवीर की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है। उसके एक बेटा हर्षित व बेटी तनवी हैं।
राजा का ताजपुर निवासी स्व. दीपक सैनी के पुत्र अंकुश सैनी (12) को तीन दिन पूर्व बुखार आया था। पहले परिजन उसका गांव में ही उपचार कराते रहे। हाल गंभीर होने पर उसे मुरादाबाद ले जाया गया। शनिवार की शाम उसे दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मृतक अंकुश के पिता दीपक की भी तीन वर्ष पूर्व बुखार से ही मौत हुई थी। ताजपुर निवासी तसमुद्दीन अहमद का छह वर्षीय पुत्र मुजम्मिल अहमद चार दिन से वायरल से पीड़ित था। उसका गांव में ही निजी चिकित्सक के यहां उपचार चल रहा था। शनिवार को हालत गंभीर होने पर उसे मुरादाबाद ले जाया गया जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया।
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गांव तेलीपुरा निवासी संगीता देवी (29) पत्नी कोमल को पांच दिन पहले बुखार आया था। परिजन उसका आसपास ही निजी चिकित्सकों से उपचार करा रहे थे। हालत गंभीर होने पर उसे अमरोहा ले जाया गया जहां उपचार के दौरान संगीता की मौत हो गई। राजा का ताजपुर में प्रत्येक घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। कई ग्रामवासियों का मुरादाबाद व अन्य स्थानों पर उपचार चल रहा है। अर्श, आशू, गीता, अब्दुल्ला, गोफिंया, वकील, इसरत, सुमैया, रश्मि, असलम, सलमान, सुहेल आदि सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी बुखार से पीड़ित हैं। निजी चिकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़ लगी है। एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर ड्रिप लगाई जा रही है। सरकारी अस्पताल की हालत दयनीय है। पिछले कई वर्षों से ताजपुर के एडीशनल पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। ग्राम पंचायत की ओर से भी गांव में दवाई का छिड़काव नहीं कराया गया है। ग्रामवासियों ने गांव में दवाई का छिड़काव कराने और स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर ग्रामवासियों का उपचार कराने की मांग की है।
चार वर्ष पूर्व ताजपुर व आसपास बुखार से हुई थीं 62 मौत
नूरपुर। वर्ष 2015 में ताजपुर व आसपास के क्षेत्र में बुखार ने जमकर कहर बरपाया था। अकेले ताजपुर में बुखार से 27 मौत हुई थीं। पास के गांव रवाना में भी बुखार से 35 ग्रामवासी मौत का शिकार बने थे। उस समय हालत यह हो गई थी कि एक दिन में चार से पांच लोग बुखार से मर रहे थे। डर के कारण ग्रामवासियों ने पलायन करना शुरु कर दिया था और रिश्तेदार भी बीमारों की खबर लेने आने से बचना शुरु हो गए थे। इस वर्ष जिस तरह बुखार से 15 दिन में पांच मौत हो चुकी हैं, उससे ग्रामवासियों को फिर से 2015 की पुनरावृति होने का डर सताने लगा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अजय धर्मेश गंधर्व का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में आया है। मौत बुखार से ही हुई हैं अथवा किसी और वजह से इसकी जांच की जाएगी।
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