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Bijnor News: किसान की उम्मीदें बहा ले गया बाढ़ का पानी

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- दस बीघा खीरे की फसल से थी लाखों रुपये आमदनी की उम्मीद
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- कलकत्ता (पश्चिम बंगाल) से मंगाया था खास किस्म का बीज
- हस्तिनापुर क्षेत्र से बंगाली मजदूर बुलाकर खेत किया था तैयार
आलम फरीदी
जलीलपुर। किसान कभी सूखी फसल को देख पानी के लिए आसमान की तरफ देखता हैं। मगर, कभी बाढ़ के पानी से बर्बाद फसल को देख रोता हैं किसान। गांव दत्तियाना के किसान निखिल त्यागी को खीरे की फसल से लाखों रुपये आय होने की उम्मीद थी। पश्चिम बंगाल से बीज मंगाया, बंगाली मजदूरों से खेत तैयार कराया। खीरे के पौधे यौवन पर थे अचानक गंगा से उफान कर निकली जलधारा किसान की फसल को बहाकर ले गई। लाचार किसान देखता रह गया।
जलीलपुर गंगा खादर क्षेत्र के गांव दत्तियाना निवासी किसान निखिल त्यागी ने गेहूं की फसल के बाद चारे की फसल कर खेत खाली छोड़ दिया था। अगस्त माह के बाद सामान्यतः बाढ़ का डर कम मानते हुए खीरे की खेती कर लाखों रुपये आय होने की उम्मीद में कलकत्ता (पश्चिम बंगाल) से खास किस्म का खीरे का बीज मंगाया था। ये बीज कम तापमान पर भी अच्छा उत्पादन देने वाला बताया जाता हैं।
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अक्तूबर माह में खीरे का उत्पादन करना क्षेत्र के किसानों के लिए अनूठा प्रयोग था। किसान निखिल त्यागी ने बताया कि इस बीज से 45 दिन में खीरा तैयार होकर मंडी जाना शुरू हो जाता हैं। अक्तूबर से दिसंबर तक खीरे का भाव पचास रुपये किलो तक मिल जाता हैं। एक हेक्टेयर जमीन में करीब दो सो क्विंटल खीरा उत्पादन हो जाता हैं। खीरे की खेती करने के लिए दस बीघा जमीन को तैयार करने में एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो गया हैं।
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मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र से बंगाली मजदूरों को बुलाकर फसल के लिए जाल तैयार कराया। दस हज़ार रूपये किलो का बीज मंगाया। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेत के चारों ओर तारबंदी कराई व झटका मशीन आदि लगवाई। फसल की बढ़वार बहुत अच्छी चल रही थी। करीब पांच लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद थी। बीज रोपण के 17वें दिन गंगा से निकलकर आई जलधारा ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लाखों रुपये खर्च कर फसल नष्ट हो गई। लाचार किसान देखता रह गया।
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