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मालन की बाढ़ : ये आफत आई नहीं, बुलाई गई है

Fri, 08 Aug 2025 12:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर में मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर पानी आने से हेमराज कॉलोनी में पानी भरने से उससे निकलकर जात
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बिजनौर। नजीबाबाद से लेकर बिजनौर तक मालन में बाढ़ का कहर हजारों लोग झेल रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र में 15 से ज्यादा गांवों में पानी भर चुका है। मेरठ-पौड़ी हाईवे तक बंद हो चुका है। अब इसके पीछे कारण हैरान करने वाले हैं। सरकारी कागजों में आज भी मालन की धारा 40 से 70 मीटर तक चौड़ी है। वहीं मौके पर अतिक्रमण के कारण यह नदी नाले का स्वरूप धारण कर चुकी है। यही कारण है कि बरसात आते ही पानी को रास्ता नहीं मिलता। कहीं तटबंध टूटते हैं तो कहीं आबादी में पानी घुस जाता है।
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जिले में मालन नदी हल्दूखाता में प्रवेश करती है। जिले की सीमा में प्रवेश करते ही मालन का स्वरूप बदलना शुरू हो जाता है। नजीबाबाद पहुंचते-पहुंचते मालन की जमीन पर खेती नजर आने लगती है। लोगों ने तटबंध लगाकर बड़े-बड़े खेत तैयार कर लिए हैं। नजीबाबाद तहसील के रिकॉर्ड में मालन नदी आज भी कागजों में 40 से 70 मीटर चौड़ी धारा से होकर बह रही है। यही हाल बिजनौर तहसील क्षेत्र में है। वहीं चार साल पहले मालन को मूल स्वरूप में लाने के प्रयास तो शुरू हुए, लेकिन मालन से अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हटाया जा सका। संवाद

शोध: 53 किलोमीटर हवाई दूरी, धरातल पर 101 किमी लंबी धारा
जिले के इतिहास पर काम कर रहे इंजी. हेमंत कुमार ने बताया कि उन्होंने मालन पर शोध किया है। मालन नदी उत्तराखंड के हल्दुखाता-शिवराजपुर क्षेत्र से बिजनौर में प्रवेश करती है और रावली के निकट गंगा जी में मिल जाती है। इन स्थानों के बीच हवाई दूरी लगभग 53 किलोमीटर है, जबकि विसर्पित दूरी लगभग 101 किलोमीटर है। इन आंकड़ों के आधार पर मालन की वर्तमान में साइनोसिटी 1.98 आती है। नदी अभियांत्रिकी में 1.5 से अधिक साइनोसिटी वाली नदियों को कटान और मार्ग परिवर्तन की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाता है। विसर्पण को साइनोसिटी नामक इकाई में नापा जाता है। इस समय जनपद बिजनौर में मालन नदी की साइनोसिटी लगभग 1.98 है। यह बाढ़ और कटान के लिए संवेदनशील की श्रेणी में आता है।
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राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही मालन नदी

मालन नदी का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। महाभारत और कालीदास की महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम् में मालन को मालिनी के नाम से लिखा गया है। मालन नदी हस्तिनापुर से राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही है। पौराणिक कथाओं में महर्षि कण्व का आश्रम मालन के तट पर ही था और शकुंतला उनके साथ रहती थी। यहीं पर राजा दुष्यंत ने पहली बार शकुंतला को देखा था। मालन और गंगा के मिलन को राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय स्थली बताया गया है।
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-सरकारी रिकॉर्ड में गांववार इतनी चौड़ी है मालन
गांव चौड़ाई मीटर में

मदूवाला 70

धनसीनी 42

ताहरपुर 41

भोगपुर 70

मथुरापुर मोर 60

पूरनपुर गढ़ी 42

खैरुल्लापुर 41

रानीपुर 44

नारायणपुर 42

बरमपुर 42

सुरसैना 40

पुण्डरी खुर्द 40

सबलपुर बीतरा 41

मौज्जमपुर नारायण 48

नोट :- (तहसील नजीबाबाद रिकॉड से लिया गया आंकड़ा)

बिजनौर में मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर पानी आने से हेमराज कॉलोनी में पानी भरने से उससे निकलकर जात

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