फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले के किसानों पर पहली बार कर्जा पांच हजार करोड़ के पार

विज्ञापन
किसान - फोटो : ????
विज्ञापन
जिले के किसानों पर पांच हजार करोड़ का कर्ज
विज्ञापन

बिजनौर। जिले के किसानों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। अब यह कर्ज पांच हजार करोड़ के भी पार जा पहुंचा है। जिले के किसानों पर पहले कभी इतना कर्ज नहीं रहा है। किसान समय से गन्ना भुगतान न मिलने व फसलों का सही दाम न मिलने की बात कहते हैं। लेकिन जो भी हो, किसानों पर कर्ज तो बढ़ ही है।
किसानों के लिए खेती में मदद को बैंकों में अनेक ऋण योजनाएं संचालित हैं। किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन, जमीन खरीदने आदि के लिए बैंकों से लोन ले सकते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख तक का लोन एक साल में जमा करने पर किसान को ब्याज में सब्सिडी भी मिलती है। किसान के खाते में तीन प्रतिशत ब्याज वापस आ जाता है। बाकी अधिकतर योजनाओं पर भी किसानों को सब्सिडी मिलती है। लेकिन किसान समय से अपने कर्ज को बैंकों में वापस जमा नहीं कर पा रहे हैं। इसका एक सबसे बड़ा कारण किसानों के मन में कर्जमाफी का लालच भी है। इस कर्जमाफी के चक्कर में किसान बैंकों से कर्ज लेते हैं और समय पर जमा नहीं करते हैं। इससे किसानों पर ब्याज बढ़ता जाता है। लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल से दिसंबर तक किसानों ने छह महीने में ही 1200 करोड़ का कर्ज लिया था। कर्जमाफी तो नहीं हुई, लेकिन किसानों पर यह कर्ज अब तक बरकरार है। पिछले साल दिसंबर तक किसानों पर 4890 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब मार्च में बढ़कर 5063 करोड़ पहुंच गया है। जिले के किसानों पर इससे पहले कभी पांच हजार से अधिक का कर्ज नहीं हुआ था। यह हाल तब है जब जिले के किसानों की आय पहले से बढ़ी है। गन्ने व बाकी फसलों में अच्छी पैदावार करके किसान आमदनी बढ़ा रहे हैं।
विज्ञापन

साल-दर-साल किसानों पर कर्ज
साल किसानों पर कर्ज
2008-09 1071 करोड़
2009-10 1296 करोड़
2010-11 1454 करोड़
2011-12 1842 करोड़
2012-13 2010 करोड़
2013-14 2874 करोड़
2014-15 3250 करोड़
2015-16 3840 करोड़
2016-17 3744 करोड़
2017-18 4300 करोड़
2018-19 3500 करोड़ (मार्च तक)
2018-19 4697 करोड़(सितंबर तक)
2018-19 4890 करोड़(दिसंबर तक)
2018-19 5063 करोड़ मार्च तक
नोट:यह आंकड़े जिला अग्रणी बैंक कार्यालय से लिए गए हैं।
छह महीने तक रोज चढ़ा 6.66 करोड़ का लोन
पिछले साल चीनी के दाम गिरने से बैंकों का भुगतान लटक गया था। चीनी कौड़ियों के दाम बिकने से मिलों ने भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इससे पहले किसानों ने पिछले साल मार्च से सितंबर तक छह महीने में बैंकों से करीब 1200 करोड़ का कर्ज लिया था। यानि किसानों पर हर रोज करीब 6.66 करोड़ का कर्ज चढ़ा।
579 करोड़ का कर्ज हुआ माफ
ऐसा नहीं है कि किसानों को कर्ज से कोई राहत नहीं मिलती है। प्रदेश सरकार ने जिले के 94 हजार 340 किसानों का 579.03 करोड़ रुपया कर्ज माफ किया है। अब यह योजना खत्म हो चुकी है। योजना में खुद को पात्र मानते हुए भी काफी किसानों ने अपना कर्ज जमा नहीं किया था।
विज्ञापन

समय पर मिले सही मूल्य
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसान नेताओं की बातों में आकर बैंकों से कर्ज लेते हैं और बाद में समय से जमा नहीं कर पाते हैं। सरकार भी किसानों को फसलों का सही मूल्य समय से दिलाए ताकि किसान को कर्जमाफी के झांसे में न फंसना पड़े।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें