बिजनौर में मलेरिया और डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से बचाने के लिए नगर पालिका अब गंबूसिया उर्फ गिप्पी मछली की मदद लेगी।
दरअसल, यह मछली मच्छरों के लार्वा को ही खा जाती है और नाले नालियों के गंदीले और खारे पानी में आसानी से रह सकती है। पालिका प्रशासन को उम्मीद है कि यह प्रयोग काफी हद तक मलेरिया और डेंगू पर नियंत्रण में सहायक होगा।
जिले में पिछले सालों में मलेरिया और डेंगू का प्रकोप किसी से छिपा नहीं है। नगर पालिकाओं व पंचायतों द्वारा नालियों में छिड़काव और फॉगिंग के बाद भी मच्छरों का हमला कम नहीं होता है। ऐसे में गंबूसिया मछली मच्छरों और इनसे फैलने वाले मलेरिया, डेंगू पर नियंत्रण में कारगर साबित हो सकती है। गंदे पानी में रहने वाली और लार्वा की शिकारी के रूप में मशहूर गंबूसिया मच्छर के लार्वा को खाकर उनका सफाया कर देती है। नगर पालिका ईओ जेके आनंद के मुताबिक पंजाब को मलेरिया मुक्त करने के लिए गंबुसिया मछली को ही हथियार बनाया गया है।
गोरखपुर जिले में भी मच्छरों के प्रकोप को गंबूसिया से ही कम किया गया है। इसलिए अब बिजनौर नगर पालिका भी गंबूसिया मछली मंगाकर उसे नाली में पालेगी। उन्होंने बताया कि गंबूसिया मछली को स्थानीय भाषा में गिप्पी भी कहा जाता है। यह क्षारीय और कम आक्सीजन वाले गंदे पानी में भी आसानी से रह सकती है। यह मछली आर्गेनिक वेस्ट, हैवी मेटल्स युक्त प्रदूषित पानी में भी जीवित रहती है।