हमारा गांव :::::
-दशकों से शिक्षित और खुशहाल गांव का रुतबा रखता है गांव पुरैनी
-15 हजार के आसपास है गांव पुरैनी की आबादी
-02 हजार लोग गांव के प्राइवेट और सरकारी नौकरियों पर कार्यरत
गौरव गोयल
नगीना। नगीना से पांच किलोमीटर दूर स्थित गांव पुरैनी पहले लकड़ी की नक्काशी के लिए जाना जाता था। मगर अब गांव की पहचान सरकारी नौकरियों से है। दशकों से पुरैनी खुशहाल व शिक्षित गांव का रुतबा रखता है। गांव में हर तीसरे घर में कोई ना कोई व्यक्ति सरकारी या प्राइवेट नौकरी पर है।
नगीना क्षेत्र का गांव पुरैनी के एक ओर राष्ट्रीय राजमार्ग काशीपुर-हरिद्वार फोरलेन और दूसरी ओर जम्मूतवी-हावड़ा रेल ट्रैक है। गांव में करीब 15 हजार आबादी निवास करती है। इस गांव में करीब दो हजार लोग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर आईपीएस व आईएएस हैं। ग्रामीणों का कहना है एक समय इस गांव को लकड़ी पर नक्काशी के कार्यों की वजह से भी खूब पहचान मिली थी। यहां पर बनाए जाने वाले लकड़ी के सामान, खिलौने व चकला बेलन की खूब मांग थी।
यह काम राम भरोसे लाल कारीगर किया करते थे। जिनके जाने के बाद यह पुस्तैनी काम बंद हो गया। वर्तमान में सबसे बड़ा नाम डीआईजी पद से सेवानिवृत होने वाले (आईपीएस अधिकारी) सुधीर कुमार सिंह का है। जो वर्तमान में सूचना आयुक्त के पद पर तैनात है। जबकि इसी गांव के आईएएस अधिकारी दिनेश चंद वर्तमान में अपर गन्ना आयुक्त/ विशेष सचिव के पद पर कार्यरत है।
मुख्यमंत्री के विशेष सचिव हैं ईशान प्रताप सिंह
गांव पुरैनी निवासी सूचना आयुक्त व पूर्व डीआईजी सुधीर कुमार सिंह के पुत्र ईशान प्रताप सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव हैं। उनकी पुत्रवधू रिया सिंह जीएसटी विभाग में सहायक कमिश्नर के पद पर कार्यरत है।
तीनों पुत्र बड़े पदों पर कार्यरत: डॉ. विजयपाल
सेवानिवृत्त पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विजयपाल बताते हैं कि उनके तीनों पुत्र नौकरी में हैं। एक पुत्र अमित कुमार जो एक्सेल कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत है। दूसरा पुत्र पंकज कुमार नागरिक उड्डयन विभाग मुंबई में सहायक निदेशक व तीसरा पुत्र नीरज कुमार प्रसार भारती मुंबई में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर तैनात है।
गांव के ज्यादातर लोग परिवहन निगम में : अनूप चौहान
पूर्व प्रधान अनूप चौहान का कहना है कि गांव के करीब दो हजार लोग प्राइवेट या सरकारी नौकरी में छोटे से बड़े से बड़े पदों पर कार्यरत है। यहां के सबसे ज्यादा लोग परिवहन निगम में हैं। क्योंकि यहां के कई बड़े अधिकारी इसी विभाग में बड़े पदों पर कार्य कर चुके हैं। रेल और शिक्षा विभाग में भी काफी संख्या में यहां के लोग नौकरी कर रहे हैं।
आजादी से पहले से गांव में है स्कूल: आमोद कुमार सिंह
सेवानिवृत्त सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (वित्त) आमोद कुमार सिंह का कहना है कि आजादी से पहले का यहां एक मिडिल स्कूल है। इसमें गांव व आसपास के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। इसी स्कूल की वजह से गांव में शिक्षा का माहौल बेहतर हुआ। इसके चलते यहां के अधिकतर लोगों का नौकरी के प्रति रुझान बढ़ता गया।