प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 10 मई 1857 : बिजनौर में दस महीने तक नहीं रहा था कोई अंग्रेज अधिकारी
बिजनौर। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 10 मई 1857 को शुरू हुआ था। बिजनौर में भी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की थी। जिसके बाद जिले में मौजूद अंग्रेज अधिकारियों को जिला छोड़कर भागना पड़ा था। 10 मई 1857 को मेरठ से उठी क्रांति की चिंगारी बिजनौर तक पहुंच गई थी। उस समय बिजनौर में लगभग आठ अंग्रेज अधिकारी मौजूद थे।
बिजनौर के वरिष्ठ साहित्यकार भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि सर सैय्यद अहमद खां ने अपनी पुस्तक सरकशी-ए-जिला बिजनौर में बताया है कि मेरठ में विद्रोह के दो दिन बाद इसकी खबरें सीमावर्ती जिले बिजनौर में भी पहुंचीं। बिजनौर के तत्कालीन अंग्रेज जिलाधिकारी एलेग्जेंडर शेक्सपियर ने वास्तविकता जानने के लिए 12 मई को कुछ घुड़सवार मेरठ भेजे, परंतु रास्ते में रावली घाट पर स्थानीय लोगों से सेनानियों द्वारा क्रांति की खबरें सुनकर घुड़सवार बीच रास्ते से ही वापस आ गए। 17 मई 1857 को बिजनौर में भी क्रांति की ज्वाला भड़क उठी। 17 मई को एक अंग्रेज अधिकारी को रावली घाट पर लूट लिया गया और बिजनौर का मेरठ से संबंध विच्छेद हो गया।
इस दौरान रुड़की से 300 हथियारबंद सैनिक नजीबाबाद पहुंचे और नवाब महमूद अली खां से जिले की कमान संभालने की मांग की। नवाब महमूद अली खान अपनी सेना लेकर बिजनौर आ गए। 20 मई को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बिजनौर पर आक्रमण किया और जिला कारागार का मुख्य द्वार तोड़ डाला। समस्त कैदी विद्रोह करते हुए जेल से बाहर आ गए। बढ़ते विद्रोह को देखते हुए अंग्रेज बेहद भयभीत हो गए और सात जून को अंग्रेज जिलाधिकारी एलेग्जेंडर शेक्सपियर द्वारा 1,13,399 रुपये का सरकारी खजाना नवाब महमूद खां को देकर जिले से भाग निकले थे। लगभग 10 महीने तक जनपद में कोई अंग्रेज अधिकारी नहीं रहा था। क्रांति की ज्वाला ठंडी पड़ने पर 26 अप्रैल 1858 को फिर से बिजनौर में अंग्रेज अधिकारी नियुक्त कर दिए गए थे।