संसाधनों की कमी से जूझ रहा दमकल विभाग
बिजनौर। यूं तो जिले की आबादी के लिहाज से दमकल विभाग के पास दस मोटर फायर इंजन होने चाहिए, लेकिन सिर्फ पांच से ही काम चलाया जा रहा है। संसाधनों की कमी से विभाग जूझ रहा है। अगर आग की बड़ी घटना हो जाए तो दूसरे शहर के फायर स्टेशन से गाड़ी बुलानी पड़ती है। तब तक आग सब कुछ खाक कर देती है।
अप्रैल के महीने में जिले में अग्निकांड की छोटी बड़ी 60 घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि मार्च के महीने में 35 जगहों पर आग लगी थी। अप्रैल में गर्मी बढ़ी तो अग्निकांड की संख्या में इजाफा हो गया। इस साल की सबसे बड़ी घटना नजीबाबाद में हुई। दो दिन पहले एक घर में लगी आग के बाद परिवार को घर से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। जिस वजह से एक महिला और एक बच्ची की जान चली गई। ऐसे अग्निकांड व्यवस्थाओं पर सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं। संसाधनों पर गौर करें तो जिले में पांच फायर स्टेशन हैं। जिन पर एक एक मोटर फायर इंजन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ी) है। जबकि सभी स्टेशन पर दो दो होनी चाहिए थी। किसी एक स्टेशन के क्षेत्र में विकराल आग लग जाए तो दूसरे स्टेशन से भी गाड़ी को बुलाना पड़ता है। ऐसे में घटनास्थल तक पहुंचने में वक्त लगता है।
खराब पड़े हैं 20 हाईडेंट
जिले के शहरों में अलग अलग जगहों पर कुल 112 हाईडेंट लगे हुए हैं। इन हाईडेंट से दकमल की गाड़ी में पानी भरने का काम किया जाता है। जिले में करीब 20 हाईडेंट खराब पड़े हुए हैं। पिछले महीने जिला मुख्यालय पर एक शोरूम में आग लगी थी तो नजदीक के हाईडेंट ने काम ही नहीं किया था। शहरों की पुरानी आबादी में अब गलियां ही नहीं बल्कि रास्ते भी तंग हो गए हैं। ऐसे में आग की घटना होने पर मौके तक दमकल की गाड़ी नहीं पहुंच पाती। कई बार दमकल विभाग का पाइप भी मौके तक नहीं पहुंच पाता। जिले में दमकल विभाग की टीम ने बड़ी बिल्डिंगों का निरीक्षण किया था। साल भर में ऐसे 260 भवन मिले हैं, जिनमें आग से सुरक्षा के नियम फॉलो नहीं होते पाए गए। इन्हें नोटिस जारी किए गए।
----- कोट
जिले में दमकल विभाग का स्टॉफ तो पूरा है। पांच फायर टैंकरों की कमी हैं। जिसके लिए उच्च अफसरों को अवगत कराया जाता है। जिले में 250 से अधिक भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कॉलेज, अस्पताल, कांपलेक्स आदि शामिल हैं। नोटिस देकर अग्नि सुरक्षा के मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया है - अजय कुमार शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी