खेतों में फसलों के अवशेष जलाए तो लगेगा जुर्माना
बिजनौर। फसल अवशेष जलने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कृषि विभाग पूरे जिले में निगरानी करेगा। इसके लिए सभी तहसीलों में टीम गठित की गई हैं। ग्राम प्रधानों व लेखपालों को व्हाट्सएप पर जोड़कर फसलों के अवशेष एसडीएम व सीओ को फसल जलाने वाले किसानों पर निगरानी की जाएगी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा प्रदूषण को कम करने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इस समय खेतों में धान की फसल तैयार है। कई जगह पर किसान खेतों में पराली जला देते हैं। पराली जलाने पर काफी प्रदूषण होता है। फसल अवशेष (फसलों की जड़, पत्ती आदि) जलाने पर जुर्माना व सजा दोनों हो सकती है साथ ही कृषि विभाग से मिलने वाली योजनाओं से भी किसान हमेशा के लिए वंचित किया जा सकता है। इसे रोकने के लिए डीएम ने रमाकांत पांडेय ने सभी तहसीलों में एसडीएम, सीओ व सहायक विकास अधिकारी कृषि की टीम बनाई गई है। टीम लेखपालों व ग्राम प्रधानों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा जाएगा। कहीं अगर कोई किसान पराली जलाएगा तो यह व्हाट्सएप पर सूचना देंगे। गेहूं की बुवाई तक यह टीम रोज निगरानी रखेगी। जिलास्तर पर भी समिति बनाई गई है। इसमें एडीएम वित्त एवं राजस्व को अध्यक्ष बनाया गया है। एसपी सिटी, उपकृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, डीआईओएस, जिला पंचायत राज अधिकारी, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी को टीम में सदस्य बनाया गया है। किसानों को कृषि यंत्रों के जरिये फसल अवशेषों को खेतों में जोतकर खाद बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
फसलों के अवशेष गलाकर बनाएं खाद
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार कृषि अवशेष खाद का काम करते हैं। किसान कृषि को जलाकर पर्यावरण और अपनी जमीन दोनों का नुकसान करते हैं। फसलों के अवशेष गलाकर किसान जमीन को और उपजाऊ बनाएं।