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कोविड जांच को अस्पताल जाने से परहेज कर रहे बुखार के मरीज

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कोविड के खौफ से अस्पताल भी नहीं जा रहे बुखार के मरीज
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बिजनौर। खांसी और बुखार की रैपिड जांच के लिए भी कोरोना के खौफ से दहशतजदा लोग अस्पताल जाने से कतरा रहे हैं। अब बदलते मौसम में न्यूमोनिया ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इस कारण जिला अस्पताल में पहले जैसी भीड़ नहीं उमड़ती।
कोरोना महामारी फैलने के कारण लॉकडाउन से पहले जिला अस्पताल में सुबह से ही स्थानीय और दूर-दराज के गांवों से आने वाले रोगियों की भारी भीड़ उमड़ती थी। मार्च माह में लॉकडाउन की घोषणा के बाद तो अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या नगण्य हो जाना स्वाभाविक ही था, लेकिन सितंबर माह में अनलॉक-4 की घोषणा के बाद भी अस्पताल में लॉकडाउन वाला नजारा ही दिखाई दे रहा है। बहुत कम संख्या में विवश होकर ही जांच करवाने के लिए आने वाले रोगियों में भी संक्रमित होने की आशंका से खौफ दिखाई देने लगा है।
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शासन के निर्देश पर लगभग पांच दिन पूर्व ही जिला अस्पताल की ओपीडी खोल दी गई। इसके बावजूद उम्मीद के अनुरूप अस्पताल में मरीज नहीं आ रहे हैं। आज भी जिला अस्पताल में रैपिड जांच के लिए आने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। सीएमएस ज्ञानचंद ने बताया कि लोगों में कोरोना से ज्यादा खौफ पॉजिटिव आने पर उसकी बदनामी से है। रैपिड जांच के लिए जाने वाले बुखार और जुकाम आदि रोगों से पीड़ित रोगियों को कोरोना से ज्यादा बदनामी का डर सता रहा है। काफी हद तक लोगों में कोरोना को लेकर आज भी यही डर बना है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज के साथ तीमारदारों को भी पकड़कर कोविड हॉस्पिटल में डाल दिया जाएगा, जिससे उनकी और उनके परिवार की बदनामी होगी।
न्यूमोनिया ने बना दी और विकट स्थिति
जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन राधेश्याम वर्मा का कहना है कि रोगियों की सुविधा के लिए गाइडलाइन के अनुसार रैपिड जांच की जाती है, लेकिन जांच के लिए अधिक रोगी नहीं आ रहे हैं। इस बीच न्यूमोनिया भी फैलने की आशंका से स्थिति और भी विकट हो गई है। उन्होंने कोरोना के संक्रमण के साथ न्यूमोनिया फैलने पर चिंता जताते हुए बताया कि इस समय बहुत अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कोरोना काल में न्यूमानिया के भी पैर पसराने की वजह से खतरा और अधिक मंडराने लगा है। उन्होंने मास्क का प्रयोग करने, बहुत अधिक जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने, हाथों को बराबर साबुन पानी से धोने अथवा सैनिटाइजर से सैनिटाइज करने की सलाह दी है।
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अगले तीन महीने बरतें अधिक सावधानी
कोरोना के नोडल अधिकारी पीआर नायर बताते हैं कि आने वाले दो-तीन महीने में कोरोना संक्रमण के और अधिक तेजी से फैलने की आशंका है, इसलिए आने वाले महीनों में पहले से भी अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नजला, जुकाम, खांसी, बुखार आदि रोगों के होने पर जांच कराने में जरा भी कोताही न बरतें, अन्यथा यह हानिकारक हो सकती है।
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