मंडावर में बुखार से पूरा जिला तप रहा है। मंडावर में एक हफ्ते में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मंडावर थाने में तैनात एसआई भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। वे मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंडावर क्षेत्र में कैंप नहीं किया है। इससे लोगों में स्वास्थ्य महकमे के प्रति नाराजगी है।
सोमवार को गांव फतहपुर निवासी जयपाल की 12 वर्षीय पुत्री तनु, गांव दयालवाला निवासी निसार की 14 साल की बेटी आरजू व विजयपाल की पत्नी गंगा देवी की बुखार से मौत हो चुकी है। क्षेत्र के हर गांव में कई कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। सभी प्राइवेट अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। तीन मौत होने के बाद भी किसी भी गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप नहीं किया है। ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूटने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में इलाज कराने के लिए प्राइवेट चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है। सीएचसी भी दोपहर दो बजे ही बंद हो जाता है। वहीं, मंडावर थाने में तैनात एसआई सुभाष तोमर को डेंगू का डंक लग गया है। परिजनों ने उनको मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं, हीमपुर के गांव गंधौर में शुक्रवार को डॉ. केपी सिंह, खेमचंद, सुषमा व राजवीर ने गांव में पहुंचकर बुखार से पीड़ित करीब 200 लोगों के सेहत की जांच की। चिकित्सकों ने स्वच्छता बनाए रखने, साफ पानी पीने व बीमार होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही उपचार के लिए ही लाने को कहा।
वहीं वहीं नूरपुर में गांव चेहला में स्वास्थ्य विभाग की कोशिश के बाद भी बुखार से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार की शाम बुखार से पीड़ित एक व्यक्ति की मौत हो गई।
गांव चेहला निवासी इमरान अख्तर (28) को दो दिन पूर्व बुखार आया था। हालत खराब होने पर शुक्रवार को परिजन ने उसे चांदपुर में एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार के लिए भर्ती कराया, जहां शाम को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इमरान की मौत से गांव में बुखार से हुई मौतों का आंकड़ा छह हो गया है। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया है।
चेहला में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
नूरपुर में गांव चेहला में बुखार से पांच मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को गांव की सुध आई है। शुक्रवार को जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची । मरीजों की जांच कर रक्त पट्टिकाएं बनाई। इसके साथ ही गांव में फॉगिंग कराई गई।
गांव चेहला में बुखार ने पीड़ितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। पिछले 15 दिनों में बुखार से गांव में पांच व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्साधिकारी को शिकायती पत्र देकर गांव में स्वास्थ्य विभाग का कैंप लगवाने की मांग की थी। शुक्रवार को जिला मलेरिया अधिकारी डा. ब्रजभूषण एवं संक्रामक रोग रोकथाम प्रभारी शारिक टीम के साथ गांव पहुंचे और कैंप लगाकर बुखार पीड़ितों की जांच की। इसके अलावा नूरपुर पीएचसी प्रभारी डा. कुनाल भी टीम के साथ पहुंचे और मरीजों को दवाइयां वितरित कीं। डा. कुनाल की टीम ने 60 ग्रामीणों की रक्त पट्टिकाएं बनाई तथा गंभीर रोगियों को अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने की सलाह दी। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कुनाल के मुताबिक गांव के किसी भी रोगी में डेंगू अथवा चिकनगुनिया के लक्षण नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि मच्छरों से बचाव के लिए गांव में फॉगिंग कराई गई है तथा ग्रामीणों को घरों व आस-पास पानी जमा न होने देने के लिए जागरूक किया गया है। उधर, राजा का ताजपुर क्षेत्र के गांव रवाना शिकारपुर में बुखार का प्रकोप अभी थमा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग गांव पर पूरी नजर रखे हुए हैं। शुक्रवार को एंबुलेंस द्वारा बुखार पीड़ितों को सीएचसी ले जाया गया। सीएचसी प्रभारी डा. विशाल दिवाकर के अनुसार शुक्रवार को करीब 60 मरीज अस्पताल पहुंचे, यहां इनका उपचार व जांच की गई। नाहिद पुत्री जाकिर व मुस्कान पुत्री नसीम अहमद की हालत देखते हुए दोनों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में 34 बेड की सुविधा है, मरीजों की बढ़ती संख्या देखते हुए अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था की जा रही है।
दो सप्ताह में तीन गुना बढ़ी मरीजों की संख्या
नूरपुर में वायरल बुखार के तेजी से पैर पसारने के कारण अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी हुई है। पिछले दो सप्ताह में मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। नूरपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कुनाल के मुताबिक पहले ओपीडी में मरीजों की अधिकतम संख्या 100 के आसपास थी, लेकिन इस समय रोजाना 300 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज वायरल बुखार से पीड़ित हैं।