थानाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह का कहना है कि मृतकों के परिजन की तहरीर पर अज्ञात कार चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
शादी के 20 साल बाद हुआ था आयुष
हादसे में पिता पुत्र की मौत होने व दो के गंभीर होने से गांव रहटोली में पूरे दिन मातम छाया रहा। गांव वालों ने बताया कि वीरेंद्र और सावित्री की शादी के बाद कोई संतान नहीं हुई थी। संतान प्राप्ति के लिए दोनों ने मठों, मजारों, देव स्थानों और मंदिर पर जा कर मन्नत मांगी थी। तब जाकर शादी के 20 वर्ष बाद आयुष पैदा हुआ। लेकिन हादसे में पति और पुत्र की मौत से सावित्री का संसार ही उजड़ गया। जबकि सावित्री भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है।
बहन की बात मान लेता तो शायद बच जाती जान
गांव महूपुरा में वीरेंद्र सिंह की बहन की ससुराल है। वीरेंद्र अपनी पत्नी और बेटे के साथ स्योहारा दशहरा का मेला देखने आया था। मेले में उसकी बहन का परिवार भी आया था। शाम को वह अपनी बहन के साथ उनके ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर महूपुरा गए। रात में नौ बजे वीरेंद्र ने घर में किसी के न होने की बात कहकर घर जाने की जिद की। बहन का पूरा परिवार जाने के लिए मना करता रहा, लेकिन वीरेंद्र हर हालत में घर जाना चाहता था। वीरेंद्र के गांव का ही कल्लू भी अपनी बाइक से महूपुरा में आया हुआ था। कल्लू के साथ वीरेंद्र भी अपनी पत्नी और बच्चे के साथ बाइक पर चल दिए। वीरेंद्र ने अपनी बहन व उसके ससुराल के लोगों की बात मान ली होती तो आज सब जिंदा होते।
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