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दशहरा देख लौट रहे पिता-पुत्र की मौत, जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही मां, पल भर में उजड़ गया संसार

Wed, 09 Oct 2019 07:27 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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सरकार चाहे कितने भी सख्त नियम बना ले, लेकिन लोग हेलमेट नहीं लगाना, ट्रिपल और फोरराइडिंग की आदत नहीं छोडे़ंगे, चाहे उन्हें अपनी जान से ही हाथ क्यों ने धोना पडे़। ऐसा ही एक हादसा यूपी के बिजनौर जिले में हुआ है। दशहरे का मेला देखकर एक परिवार के चार लोग बाइक से घर लौट रहे थे। किसी ने भी हेलमेट नहीं लगाया था। बुढ़नपुर नहर पुल के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर कार की चपेट में आ गई। हादसे में पिता और उनके पांच साल के बेटे की मौत हो गई। जबकि बच्चे की मां और एक अन्य व्यक्ति को हायर सेंटर रेफर किया गया है। यह हादसा इतना दुखद है कि घायल महिला का संसार ही उजड़ गया। वह खुद भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।

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स्योहारा थाने के गांव रहटोली निवासी 40 वर्षीय वीरेंद्र कुमार मंगलवार रात पत्नी सावित्री, पांच साल के बेटे आयुष और गांव के ही 19 वर्षीय युवक कल्लू के साथ दशहरे का मेला देखने के बाद रिश्तेदारी के गांव महुपुरा से अपने घर जा रहे थे। बाइक कल्लू चला रहा था। एक बाइक पर चार सवार और किसी ने भी हेलमेट नहीं लगाया था। रास्ते में बुढ़नपुर के नहर के पुल पर उनकी बाइक अनियंत्रित होकर सामने से आ रही कार की चपेट में आ गई। दोनों वाहनों की टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। बुरी तरह घायल हुए वीरेंद्र और आयुष की मौके पर ही मौत हो गई। 

वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल सावित्री और कल्लू को सीएससी में भर्ती कराया। जहां चिकित्सकों ने दोनों की नाजुक हालत को देखते हुए सावित्री को मुरादाबाद और कल्लू को मेरठ के लिए रेफर कर दिया। पुलिस ने शवों का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना का पता चलने पर मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया।
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थानाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह का कहना है कि मृतकों के परिजन की तहरीर पर अज्ञात कार चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

शादी के 20 साल बाद हुआ था आयुष
हादसे में पिता पुत्र की मौत होने व दो के गंभीर होने से गांव रहटोली में पूरे दिन मातम छाया रहा। गांव वालों ने बताया कि वीरेंद्र और सावित्री की शादी के बाद कोई संतान नहीं हुई थी। संतान प्राप्ति के लिए दोनों ने मठों, मजारों, देव स्थानों और मंदिर पर जा कर मन्नत मांगी थी। तब जाकर शादी के 20 वर्ष बाद आयुष पैदा हुआ। लेकिन हादसे में पति और पुत्र की मौत से सावित्री का संसार ही उजड़ गया। जबकि सावित्री भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है।

बहन की बात मान लेता तो शायद बच जाती जान
गांव महूपुरा में वीरेंद्र सिंह की बहन की ससुराल है। वीरेंद्र अपनी पत्नी और बेटे के साथ स्योहारा दशहरा का मेला देखने आया था। मेले में उसकी बहन का परिवार भी आया था। शाम को वह अपनी बहन के साथ उनके ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर महूपुरा गए। रात में नौ बजे वीरेंद्र ने घर में किसी के न होने की बात कहकर घर जाने की जिद की। बहन का पूरा परिवार जाने के लिए मना करता रहा, लेकिन वीरेंद्र हर हालत में घर जाना चाहता था। वीरेंद्र के गांव का ही कल्लू भी अपनी बाइक से महूपुरा में आया हुआ था। कल्लू के साथ वीरेंद्र भी अपनी पत्नी और बच्चे के साथ बाइक पर चल दिए। वीरेंद्र ने अपनी बहन व उसके ससुराल के लोगों की बात मान ली होती तो आज सब जिंदा होते।

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