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जल में कल तलाशेंगे किसान

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जल में कल तलाशेंगे किसान
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बिजनौर। जल ही जीवन की कहावत तो सभी सुनी ही है, इसी को आगे बढ़ाते हुए किसानों को जल संरक्षण के साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रधानमंत्री किसान योजना के अंतर्गत जल संरक्षण के लिए खेती-तालाब कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें 25 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। उप निदेशक कृषि गिरीश चंद्र ने जमीन के पोषक तत्वों को बचाने के लिए खेत की मेढ़ बंदी को जरूरी बताया है।
कृषि भवन सभागार में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र द्वारा खेत-तालाब योजना के महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्रधानमंत्री किसान योजना का उद्देश्य जल संरक्षण के साथ-साथ फसलों की आकस्मिक सिंचाई और कृषि संबंधी गतिविधियों जलीय खेती जैसे मछली पालन, पौधरोपण, सब्जी व फल उत्पादन आदि को अपनाकर अतिरिक्त लाभ प्राप्त करना है।
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उप कृषि निदेशक ने खेतों की मेढ़बंदी को जरूरी बताया। कहा कि खेत की मेढ़ अनिवार्य रूप से मजबूत एवं सुव्यवस्थित होनी चाहिए। इससे न केवल खेती की उपजाऊ मिट्टी का क्षरण रुकता है, बल्कि वर्षा का पानी संरक्षित होता है। प्रथम वर्षा के साथ वायुमंडलीय नाइट्रोजन भी मिट्टी में मिलकर भूमि को उर्वर बनाती है। भूमि संरक्षण अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि जिले में 25 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। योजना के तहत 24 तालाब का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। पपीता, करौंदा, चीकू, मछली पालन की जानकारी दी गई है। जिला उद्यान अधिकारी जितेंद्र सिंह, योगेंद्र पाल सिंह योगी, जहूर हैदर आदि मौजूद रहे।
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ये है खेती-तालाब योजना
योजना के अंतर्गत तालाबों की खोदाई होती है। तालाब 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा तथा 3 मीटर गहरा खोदा जाता है। कुल लागत 1.05 लाख है। जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान देय हैं। अनुदान कृषकों को खोदाई के विभिन्न स्तरों पर तीन किस्तों में दिया जाता है। पात्रों के चयन की प्रक्रिया ऑनलाइन होता है। पात्र ‘पहले आओ पहले पाओ के आधार पर योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन टोकन जनरेट कर सकते हैं।
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