धामपुर कृषि प्रसार भवन में पर्यवेक्षक प्रशिक्षण में जानकारी देते वैज्ञानिक।
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रेड रॉट से बचने के लिए गन्ने की प्रजाति बदलें किसान
बिजनौर, धामपुर। गन्ना विकास संस्थान मुरादाबाद के तत्वावधान में कृषि प्रसार भवन में बुधवार से धामपुर, अफजलगढ़, स्योहारा बिलाई एवं चांदपुर के लगभग 50 गन्ना पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण शुरू हुआ। वैज्ञानिकों ने बताया कि रेड रॉट बीमारी से बचने के लिए किसानों को गन्ने की प्रजाति बदलनी पडे़गी।
गन्ना वैज्ञानिक अवधेश सिंह डागर ने गन्ने की फसल को रेड रॉट बीमारी से बचाने और उपचार की जानकारी दी। कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए फसल चक्र को अपनाना चाहिए। गन्ने की प्रजातियों व बीज का बदलाव करें। फंगीसाइड से उपचारित बीज से गन्ने की बुवाई करें। गन्ने की बुवाई करते समय 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बायोफंगीसाइड, ट्राईकोडरमा का प्रयोग प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जरूर करना चाहिए। गन्ने की बुवाई के दौरान रोगिल पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर फेंक दें।
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उप कृषि निदेशक अवधेश कुमार मिश्र ने गन्ने के साथ में सहफसली खेती के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उप निदेशक मनोज श्रीवास्तव ने गन्ने की खेती के बारे में जानकारी दी। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अमित कुमार पांडेय ने विभागीय ईआरपी माड्यूल के बारे में जानकारी दी।