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बिचौलियों से आजादी मिली तो किसानों को हुआ फायदा

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बिजनौर में किरतपुर क्षेत्र में एक क्रेशर में बनाया जा रहा गुड़। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। किसानों के फसल को मंडी में बेचने की बाध्यता खत्म होने से क्रेशर, कोल्हू चलाने वाले किसानों को फायदा हो रहा है। बिचौलियों का दखल खत्म होने से व्यापारी और किसान दोनों मुनाफा कमा रहे हैं। आसपास के व्यापारी सीधे किसानों के पास आकर गुड़ खरीद रहे हैं। इससे किसानों को आढ़तियों के तीन प्रतिशत कमीशन से तो आजादी मिल ही गई है, ढुलान की लागत से भी आजादी मिल गई है।
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जिले में गुड़ का कारोबार भी खूब फल फूल रहा है। किसान भी थोड़ा मुनाफा कमाने की आस में कोल्हू लगाकर गुड़ बना रहे हैं। जिले में केवल छह जगह ही मंडी हैं। किसान अपना गुड़ या तो सीधे उपभोक्ताओं को बेचते हैं या मंडियों में व्यापारियों को। सीधे उपभोक्ताओं को गुड़ बेचने से ज्यादा माल नहीं बिकता जबकि व्यापारी किसानों से काफी माल खरीद लेते हैं। पहले व्यापारी किसानों से मंडी में ही गुड़ खरीद सकता था। नियम के अनुसार मंडी में किसान से किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता लेकिन किसानों से बिचौलिए कुल बेची गई फसल का तीन प्रतिशत मंडी शुल्क के रूप में लेते हैं यानि 100 रुपये की फसल बेचने पर बिना किसी लागत के तीन रुपये आढ़ती की जेब में चले जाते हैं।
केंद्र सरकार के कृषि कानून से मंडी में फसल बेचने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। व्यापारी अगर किसान से मंडी समिति परिसर से बाहर फसल खरीदता है तो व्यापारी को मंडी शुल्क नहीं देना है। अब व्यापारी किसानों से कोल्हुओं पर ही आकर गुड़ खरीद रहे हैं। इससे किसान की जेब से जाने वाला तीन प्रतिशत कमीशन उसे सीधे सीधे बच रहा है। इसके अलावा गुड़ ढुलान में लगने वाला करीब 20 रुपये प्रति क्विंटल का किराया-भाड़ा, मजदूरी और सबसे बड़ी बात समय बच रहा है।
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ऐसे समझें हिसाब
गुड़ के दाम किसान को ढाई हजार रुपये क्विंटल मिल रहे हैं। ऐसे में दस क्विंटल गुड़ के 25 हजार रुपये मिलते हैं। इस पर मंडी में तीन प्रतिशत के हिसाब से 750 रुपये की आढ़त बिचौलिया यानि आढ़ती ले लेता है। 200 रुपये तक का किराया भाड़ा लगता है। ऐसे में किसान के करीब एक हजार रुपये फसल बेचने में लग जाते हैं। अब घर बैठे किसान को दस क्विंटल गुड़ के 24 हजार 800 रुपये मिल रहे हैं। यानि उसे 800 रुपये दस क्विंटल गुड़ पर बच रहे हैं। व्यापारी को भी मंडी शुल्क से आजादी मिली है।
जिले में इस समय 85 क्रेशर व करीब 800 कोल्हू चल रहे हैं। ये हर दूसरे तीसरे दिन माल को मंडियों में बेचने के लिए जाते हैं। अब व्यापारी खुद चलकर इन किसानों के पास आ रहे हैं।
व्यापारी खुद भी कर रहे संपर्क
गांव इनामपुरा निवासी क्रेशर मालिक चंदन सैनी का कहना है कि काफी व्यापारी कोल्हू से ही गुड़ खरीद रहे हैं। इससे काफी फायदा हुआ है। मंडी की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है। अब व्यापारी खुद भी उनसे संपर्क कर रहे हैं।
मिली है राहत
गांव चकफेरी निवासी कोल्हू मालिक कुशल सिंह के अनुसार इस बार कुछ व्यापारी गुड़ खरीदने के लिए सीधे भी आ रहे हैं। इससे थोड़ी राहत मिली है।
कोल्हू पर व्यापारियों की आवक बढ़ी
गांव जामनवाला निवासी दिलशाद अंसारी के अनुसार उनके कोल्हू पर पहले भी कुछ व्यापारी आकर गुड़ खरीद लेते थे। इस बार ऐसे व्यापारियों की तादाद बढ़ी है।
सभी चाहते हैं मुनाफा कमाना
व्यापारी कपिल कुमार के अनुुसार किसानों से सीधे माल खरीदने से व्यापारियों को भी फायदा है। व्यापारी और किसान तो वही करेंगे, जिससे उन्हें चार पैैसे का फायदा हो। पहले चांदपुर में दस से 15 ट्रक गुड़ रोज आता था। अब पांच ट्रक गुड़ भी नहीं आ रहा है।
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