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परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की खंगाली जा रही कुंडली

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परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की खंगाली जा रही कुंडली
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बिजनौर। परिषदीय प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच शुरू हो गई है। वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक नियुक्ति पाए गए शिक्षक को के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। जिले में कई शिक्षक संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं। बीएसए ने जांचके दायरे में आए जनपद के शिक्षकों की संख्या 45 बताई है।
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शासन ने परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त करने वाले शिक्षक जांच के दायरे में हैं। शिक्षा विभाग के सूत्रों की माने तो वर्ष 2004 से वर्ष 2014 के बीच नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों की जांच पड़ताल शुरू की गई है साथ ही जिन शिक्षकों ने संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएडकी डिग्री प्राप्त की है। ऐसे शिक्षकों की भी जांच की जा रही है। शिक्षा विभाग की मानें तो जिले में इस अवधि के बीच करीब 3000 अध्यापक नियुक्ति पाए हैं अब इनके प्रमाण पत्रों की जांच की सूचना से शिक्षकों में हड़कंप मचा है। इससे पहले भी कई बार शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की गई थी। वर्ष 2007 में भी जिले में आठ शिक्षक के प्रमाण पत्र फर्जी मिले थे। बाद में शिक्षा विभाग ने कार्यभार ग्रहण करने वाले छह शिक्षकों के प्रमाण पत्र की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। नियुक्ति निरस्त होने वाले शिक्षकों से नियुक्ति की अवधि की धनराशि वापस नहीं ली गई। अब पिछले वर्षों में नियुक्ति पाए फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नियुक्ति पाए शिक्षक को पर यदि गाज गिरी तो कई शिक्षा विभाग के कई लोग जांच के दायरे में होंगे। बीएसए महेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के चार हजार शिक्षकों की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। इनमें 45 बिजनौर के भी हैं।
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