सेवानिवृत्त कर्नल आरएस सिरोही।
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फिर सीमा पर जाने को तैयार हैं पूर्व सैनिक
अफजलगढ़/ कादराबाद। चीन की नापाक हरकत के खिलाफ पूर्व सैनिकों में आक्रोश है। देश का हर पूर्व सैनिक आज भी भारत माता की रक्षा के लिए सीमा पर जाकर जान दुश्मन से सैनिकों की शहादत का बदला लेने के लिए तैयार है। भारतीय जवानों को धोखे से मारने करने वाले दुश्मन को सभी सबक सिखाना चाहते हैं।
कल्लूवाला निवासी पूर्व कैप्टन गुरदयाल सिंह ने भारतीय जवानों को धोखे से मारने करने की घोर निंदा की है। उनका कहना है 1962 की भारत-चीन युद्ध के समय वह जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। उन्हें एलएसी पर चीन के खिलाफ युद्ध का हिस्सा नहीं बन पाने का अफसोस है। लेकिन आज फिर से देश उसी दौर में पहुंच गया है। यदि चीन के साथ युद्ध होता है तो वह भारत माता की रक्षा के लिए जान न्योछावर करने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता, चाचा और छोटा भाई भी फौज में रहकर देश की सेवा कर चुके हैं।
सेवानिवृत्त कर्नल आरएस सिरोही का कहना है कि चीन पाक अधिकृत कश्मीर में अपने सीपीईसी प्रोजेक्ट पर भारत के विरोधी रुख और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनाए से बौखलाया हुआ है। इसके अलावा कोरोना वायरस के लिए पूरी दुनिया चीन को जिम्मेदार मान रही है। दुनिया का ध्यान बांटने के लिए भी वह भारत के साथ सीमा पर इस तरह हरकतें कर रहा है। उसने भारत को 1962 का भारत समझने की भूल की है। हम चीन को बताना चाहते हैं कि यह 2020 का भारत है। वैसे तो देश के वीर सपूत दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए काफी हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो हम आज भी देश के लिए कुर्बानी देने को तैयार हैं। सूबेदार मेजर हर्ष सिंह रावत का कहना है कि अब समय आ गया है कि भारत चीन को मुंहतोड़ जवाब दे। सरकार की ओर से सैनिकों को छूट मिलनी चाहिए कि वह अपने साथियों की शहादत का बदला ले सकें। भूपेंद्र सिंह भिक्कावाला का कहना है कि इस समय देश तीन-तीन मोर्चो पर लड़ रहा है। चीन, पाकिस्तान और चीनी कोरोना वायरस के साथ। देश को एकजुट होकर इन तीनों मुसीबतों को पूरे साहस के साथ सामना करना है और हराना है।
सूबेदार मेजर हर्ष सिंह रावत।- फोटो : BIJNOR
भूपेंद्र सिंह रावत।- फोटो : BIJNOR
पूर्व कैप्टन सरदार गुरदयाल सिंह।- फोटो : BIJNOR