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300 के रेट पर भी क्रेशरों को नहीं मिल रहा गन्ना

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300 के रेट पर भी क्रेशरों को नहीं मिल रहा गन्ना
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बिजनौर। साल की शुरुआत में पिछले पेराई सत्र में गन्ने की दुर्गति हुई थी। गन्ना पेराई सीजन जून तक खिंचा और लगा कि अगला सीजन इससे भी ज्यादा दुश्वारियों वाला होगा। बढ़े साढ़े 11 प्रतिशत रकबे ने किसानों और चीनी मिलों के भी माथे पर बल ला दिए। किसानों को लग रहा था कि गन्ना जाने कैसे बिकेगा। लेकिन साल जाते जाते कोल्हू व क्रेशरों की बढ़ी तादाद से कोल्हू व क्रेशरों पर गन्ने के दाम 300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। इस बंपर रेट पर भी किसान गन्ना देने को तैयार नहीं हैं। गन्ना न मिलने की वजह से क्रेशर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। नए साल से कई क्रेशर पेराई बंद कर देंगे।
जिले में चीनी मिल के शुरू होने से डेढ़-दो महीने पहले ही कोल्हू, क्रेशर चलने शुरू हो गए थे। जब चीनी मिल पेराई शुरू करने के लिए मरम्मत करा रही थीं तब कोल्हू व क्रेशरों में गुड़ बनने लगा था। जब कोल्हू चलने शुरू हुए थे तब गुड़ के दाम तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे थे। क्रेशर चलने से किसानों को बहुत फायदा हुआ और उन्होंने काफी गन्ना क्रेशर, कोल्हुओं में डाला। बाद में किसानों ने क्रेशरों में गन्ना डालना कम कर दिया और गुड़ के दाम भी गिर गए। गुड़ के दाम 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए। गुड़ के दाम गिरने के बाद भी जरूरत को देखते हुए कोल्हुओं व क्रेशरों में गन्ने के दाम 20 रुपये बढ़कर 260 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गए। अब भी गुड़ के दाम 2650 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं जबकि कोल्हू व क्रेशरों पर गन्ने के दाम बढ़कर 290 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गए हैं। कोल्हू व क्रेशरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से गन्ने के दाम बढ़े हैं लेकिन इस पर भी किसान गन्ना आपूर्ति के लिए तैयार नहीं हैं। गन्ना न मिलने की वजह से कई कोल्हू व क्रेशर पेराई बंद करने वाले हैं। माना जा रहा है करीब 25 प्रतिशत क्रेशर बंद हो जाएंगे।
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बहुत बढ़ गए क्रेशर-कोल्हू
पिछले साल जिले में 69 क्रेशर चले थे और करीब 800 कोल्हू। इस साल 114 क्रेशर और करीब 1400 कोल्हू चल रहे हैं। गन्ना खरीदने के लिए इनमें आपस में प्रतिस्पर्धा बढ़ती चली गई गुड़ के दाम गिरते गए। क्रेशर की संख्या में इजाफा होने से इनमें आपस में प्राइसवार से गन्ने के दाम 240 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। इससे किसानों को ही फायदा हो रहा है।
चीनी मिल के करीब पहुंचे दाम
सरकार द्वारा अगेती प्रजाति का गन्ना मूल्य 325 व सामान्य का मूल्य 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। सेंटर पर गन्ना खरीद पर कम से कम साढ़े चार रुपये प्रति क्विंटल का किराया भी किसान के पास से ही कटता है। ऐसे में देखा जाए तो क्रेशरों पर चीनी मिलों के दाम पर गन्ना खरीदा जा रहा है।
गन्ने की पैदावार कम
इस साल गन्ने की पैदावार भी कम है। गन्ना 10 से 15 प्रतिशत तक कम निकल रहा है। ऐसे में किसान चाहते हैं कि वे मिलों को ही गन्ना डालें ताकि अगले साल उनकी गन्ना पर्ची कम न हों। इस वजह से भी अब किसान कोल्हू, क्रेशरों से मुंह मोड़ रहे हैं।
चीनी मिल बता रहीं नुकसान
कोल्हू, क्रेशर मालिक गन्ना खरीदने के लिए भले ही पूरे जोर लगा रहे हों लेकिन चीनी मिल मालिक अब भी खुद को नुकसान में ही बता रहे हैं। चीनी मिल मालिक गन्ने के दामों में बढ़ोतरी न करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भी लिख चुके हैं।
खुद की प्रतिस्पर्धा से नुकसान
गांव करौंदा में क्रेशर चला रहे हरपाल सिंह के अनुसार इस बार आपस में ही प्रतिस्पर्धा से बहुत नुकसान हो गया। एक जनवरी से क्रेशर कुछ दिन के लिए बंद करेंगे।
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290 पर भी नहीं मिल रहा गन्ना
गांव सोतखेड़ी में क्रेशर चला रहे व्यापारी रामदर्शन अग्रवाल के अनुसार किसान 290 रुपये प्रति क्विंटल में भी गन्ना देने को तैयार नहीं है। गन्ना न मिलने से बहुत नुकसान हो रह है। अभी क्रेशर बंद कराया जा रहा है।
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