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रकबा बढ़ा फिर भी मिलों में कम रहेगी गन्ने की पेराई

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बिजनौर। पिछले साल गन्ना रकबे में साढ़े 11 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि के बाद भी चीनी मिल पिछले साल से कम ही गन्ना पेरेंगी। गन्ने की पैड़ी की पैदावार कम होने और कोल्हू, क्रेशर पर ज्यादा गन्ने की पेराई होने को इसके पीछे वजह माना जा रहा है। बाजार में चीनी के रेट कम हैं, ऐसे में कम उत्पादन को भी चीनी मिल अधिकारी संतुष्ट है और उनका मानना है कि इससे आपूर्ति और मांग में संतुलन बना रहेगा।
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जिले में नौ चीनी मिलों को किसान गन्ने की आपूर्ति करते हैं। इसके अलावा जिले में कोल्हू व क्रेशर भी काफी संख्या में चलते हैं। पिछले साल मार्च में लॉक डाउन लगने की वजह से ज्यादातर कोल्हू व क्रेशर बंद ही गए थे। सारा गन्ना चीनी मिलों की ओर डायवर्ट हो गया था। चीनी मिलों में गन्ना तुलवाने के लिए मारामारी रहती थी। किसानों ने लॉक डाउन में सब्जी आदि की खेती से भी किनारा कर लिया था और गन्ने की फसल बोई थी। इससे गन्ने का रकबा साढ़े 11 प्रतिशत बढ़ गया था। इतने बड़े स्तर पर गन्ना रकबा बढ़ने से किसानों के साथ चीनी मिलों के अफसरों की पेशानी पर भी बल पड़ गए। चीनी के दाम पहले ही कम चल रहे थे। रकबा बढ़ने से गन्ने की पैदावार भी इतनी ही बढ़ जाती। चीनी मिलों ने गन्ना विभाग को गन्ने की जो डिमांड भेजी थी वह पिछले साल की पेराई से भी कम थी। जिले में इस बार बड़ी तादाद में खुले कोल्हू व क्रेशरों ने चीनी मिलों व किसानों दोनों को ही बहुत राहत दी। किसानों ने काफी मात्रा में कोल्हू व क्रेशरों को गन्ना आपूर्ति की। कुछ चीनी मिल के क्षेत्र में गन्ने की पैड़ी की पैदावार भी कम हुई। इससे रकबे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने के बाद भी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई पिछले साल से कम ही होगी।
मिल पिछले वर्ष इस वर्ष अनुमान
धामपुर 232 230
स्योहारा 214 195
बिलाई. 146 135
बहादरपुर 119 118
बरकातपुर 141 135
बुंदकी 128 123
चांदपुर 64 62
बिजनौर 40 39
नजीबाबाद 50 48
( गन्ना पेराई के आंकड़े लाख क्विंटल में हैं।:
-इस बार पेराई कम रहेगी। पैड़ी की कम पैदावार और ज्यादा कोल्हू, क्रेशर चलने से ऐसा हुआ है। मूल्य कम होने के बावजूद चीनी का उत्पादन जितना अधिक होगा, उतना ही मिलों को समय से चीनी बेचने में परेशानी होती है। सुखवीर सिंह, अध्यासी स्योहारा चीनी मिल
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-पिछले साल कब मुकाबले इस साल पेराई कम ही रहेगी। चीनी के ज्यादा उत्पादन की वजह से इसके दाम कम चल रहे हैं। कम चीनी बनने से मांग व आपूर्ति का संतुलन बना रहेगा। परोपकार सिंह, महाप्रबंधक (गन्ना) बिलाई चीनी मिल
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