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बीते साल, घरों के सीवेज से नहीं जुड़ी ट्रीटमेंट प्लांट की पाइप लाइन

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बिजनौर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में मशीनों से साफ होता नालों का पानी। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। करीब एक दशक पहले शहर में सवा सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके सीवर लाइन डाली गई। सीवर के गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था। इसमें साल 2018 से 19 नालों का पानी साफ किया जा रहा है, लेकिन घरों के कनेक्शन अभी तक नहीं पाए। पालिका के अफसर बजट का प्रस्ताव भेजने का दावा करते रहे, अब चार साल बाद बजट न मिलने की सफाई देकर अपना पल्ला झाड़ रहे है। अब फिर से चालीस करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजने का दावा किया जा रहा है।
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साल 2010 में बिजनौर शहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम चालू हुआ था। उस वक्त इस परियोजना पर 117 करोड़ रुपये की लागत आई। करीब 27 करोड़ रुपये सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च हुआ, बाकी पाइप लाइन बिछाने और जमीन आदि में खर्च हो गया। खैर, साल 2018 में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से एक नाला जोड़ दिया गया था। अब शहर से निकलने वाले 19 नालों का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किया जा रहा है। करीब 18 करोड़ लीटर पानी रोजाना शोधित किया जाता है, जबकि प्लांट की क्षमता 25 करोड़ लीटर की है। बता दें कि पानी को साफ करने के लिए इसमें ऑक्सीजन मिलाई जाती है। जिससे खेती में इस्तेमाल करने लायक बनाया जा सके।
बजट के अभाव में नहीं हुए घरों के कनेक्शन
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक घरों से निकलने वाला सेप्टिक टैंक का सीवेज भी पहुंचना था, लेकिन पाइप लाइन के कनेक्शन नहीं हो पाए। पहले भी कई बार जल निगम की ओर से कनेक्शन करने के लिए एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया, लेकिन बजट नहीं मिल सका। अब फिर से 40 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को भेजा गया है।
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क्या बोले शहरवासी....
अधिकारियों की लापरवाही है कि अभी तक घरों के सेप्टिक टैंक को सीवर पाइप लाइन से नहीं जोड़ा गया है। जिससे गंदा पानी निकलकर सीधे नालियों में जाता है और गंदगी होती है।...केके अग्रवाल
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की परियोजना पर भारी भरकम बजट खर्च हुआ। इसके बाद भी अभी तक घरों के कनेक्शन नहीं किया जाना, इस परियोजना की लेटलतीफी को जाहिर करता है। ...नृपेंद्र देशवाल एडवोकेट
सीवर की पाइप लाइन बिछाने में पहले दिन से ही भरपूर भ्रष्टाचार हुआ है। जितने भी मेन हॉल सड़कों पर दिए हैं, सभी में घटिया क्वालिटी की ईंटों का इस्तेमाल हुआ। इनके ढक्कन धंस चुके हैं। यह सीवर लाइन चल नहीं पाएगी। ....मनोज कुच्छल, व्यापारी नेता
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना का मकसद तब पूरा हो पाता जब घरों का गंदा पानी भी वहां तक पहुंचे। अब घरों के कनेक्शन ही नहीं किए गए हैं, ऐसे में भूूजल भी प्रदूषित हो रहा है। ...मनीष कुमार, एडवोकेट
घरों मेें कनेक्शन अभी तक नहीं किए हैं। कुछ नालियों के कनेक्शन नई बस्ती में जोड़े हैं, यह व्यवस्था ओवर फ्लो पानी के लिए की गई है। जबकि यह परियोजना घरों के गंदे पानी के लिए बनी थी। ऐसे में भारी लागत से बनी परियोजनों के फेल होने की संभावना है। ....राजवीर सिंह, एडवोकेट
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सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से 19 नाले जुड़े हुए हैं। जिनका पानी शोधन हो रहा है। बिजनौर के गंगा बेसिन में होने और स्वच्छता की रैकिंग में अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से इंसेटिव के लिए प्रपोजल मांगा गया है। हमने इस प्रपोजल में सीवर लाइन से 25 हजार घरों केे जोड़ने के लिए 40 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा है। ....विकास कुमार, ईओ पालिका
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